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बदलते रिश्तों की अंतरंग कहानियां

जगरनॉट बुक्स हिंदी में दिलचस्प, मनोरंजक और रोमांचक किताबें लेकर आया है. ये रचनाएं तेज रफ्तार, शहरी और कस्बाई जिंदगी में बदलते, उलझते, जटिल होते निजी और सामाजिक रिश्तों पर नजर डालती हैं.

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बांहों के दरमियां
गीताश्री
यह उपन्यास एक छोटे से शहर से महानगर में आकर रहने वाली रति की कशमकश और बदलाव की कहानी है, जिसे अपने पति की मर्जी के आगे झुकते हुए जोड़ों की अदला-बदली वाली पार्टियों में अनचाहे ही जाना पड़ता है. अंत में जब वो इसे अपनी जिंदगी का हिस्सा बना कर अपना लेती है तो उसके पति को इससे भी परेशानी होने लगती है. रिश्तों की जटिलता पर एक अंतरंग उपन्यास.

 

 

 

 

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zindagi_live_150_rgb_1493035715_380x570ज़िंदगी लाइव
प्रियदर्शन
मुंबई 26/11 की रात. हर तरफ़ अफरा-तफरी का माहौल पसरा हुआ. वहीं दिल्ली में टीवी ऐंकर सुलभा और उनके रिपोर्टर पति विशाल काम की आपाधापी में अपने छोटे-से बेटे अभि को क्रेच से उठाना भूल जाते हैं. ये भूल बहुत भारी साबित होती है. उनका बेटा गुम हो जाता है और बाद में उसका अपहरण कर लिया जाता है. उसकी तलाश में वे बदहवास हो जाते हैं. क्या अभि उन्हें मिल जाएगा या ये उनके जीवन के सबसे भयावह दिन होंगे?
कहानी-कविता, पत्रकारिता और आलोचना से जुड़ी आठ किताबों के बाद प्रियदर्शन का यह पहला उपन्यास है. प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सम्मानित संस्थानों से जुड़े रहे प्रियदर्शन अपने सुगठित गद्य और वैचारिक हस्तक्षेप के लिए भी जाने जाते हैं. मूलत: रांची के, फिलहाल गाज़ियाबाद में. एनडीटीवी में कार्यरत.

 

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mahuacharit_1493029297_380x570महुआचरित
काशीनाथ सिंह
महुआचरित, मशहूर लेखक काशीनाथ सिंह की एक अनोखी लंबी कहानी है. प्रतिष्ठित पत्रिका तद्भव में प्रकाशित यह कहानी समकालीन समाज के परिवेश में अपनी पहचान और भूमिका की तलाश की कहानी है. यह ऐसे किरदारों की कहानी है, जो उन्मुक्त और स्वतंत्र जीवन जीना चाहते हैं, उन्हें अपने जीवन में किसी की दखल स्वीकार नहीं है. कहानी की केंद्रीय चरित्र महुआ का पति हर्षुल उसके प्रति आसक्त है, लेकिन शादी के बाद वह उसको धोखा देता है जिसके बाद महुआ को लगता है कि उसे अपने जीवन को अपने हिसाब से व्यवस्थित करना चाहिए.

 

 

 

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dusri_jannat_300_rgb_1493190682_380x570दूसरी जन्नत
नासिरा शर्मा
ज़फ़र अब्बास के घर में रौनक है कि उनके तीसरे बेटे की शादी हो रही है लेकिन सबको इसकी फिक्र भी है कि तीसरी बहू कैसी होगी. क्या वह बाक़ी बहुओं की तरह घर के रिवाज़ों और बदलाव की अपनी ख़्वाहिशों के बीच संतुलन बिठा पाएगी? उनकी फिक्र बेबुनियाद नहीं है क्योंकि उनकी दोनों घरेलू बहुओं से उलट, रुख़साना पेशे से डॉक्टर है. आखिर अपने पैरों पर खड़ी एक लड़की कहीं परिवार को उसकी जड़ों से तो नहीं उखाड़ देगी?
ऊपर से ठहरे और शांत दिखने वाले मुस्लिम समाज के भीतर बहुत कुछ बदल रहा है. जो नहीं बदल रहा, उसको बदलने की ख्वाहिशें और कोशिशें कम नहीं हैं. सतह पर नहीं दिखने वाली इसी हलचल को कुरेदता हुआ, नासिरा शर्मा यह उपन्यास रिश्तों की गरमाहट और अपनेपन से सफर शुरू करते हुए दूरियों, मतभेदों, टकरावों और बहसों का एक नक्शा पेश करता है. इसमें एक पुकार है, जिसकी अनदेखी मुश्किल है.

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9788173153372_1493303807_380x570महाश्वेता
सुधा मूर्ति
अनुपमा की शादी एक खूबसूरत जवान डॉक्टर आनंद से होती है और वह जिंदगी के हसीन सपनों में डूब जाती है. लेकिन तभी उसे यह जान कर धक्का लगता है कि उसको ल्यूकोडर्मा यानी सफेद दाग की बीमारी है, जिसे समाज में एक अभिशाप माना जाता है. उसे अपनी सास और अपने मायके, दोनों जगहों से प्रताड़ना झेलनी पड़ती है. वह खुदकुशी के बारे में भी सोचने लगती है, लेकिन फिर वह फैसला करती है कि जो जिंदगी उसे मिली है, वह उसे जीएगी. फिर वह मुंबई चली आती है और अध्यापन का काम करने लगती है. यहां एक डॉक्टर उससे शादी का प्रस्ताव रखता है, लेकिन वह मना कर देती है और कहती है कि वे दोस्त ही अच्छे हैं.

 

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