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खाना सही अनुपात में खाएं

हम में से ज़्यादातर लोग जब डाइटिंग करते हैं तो इसके अंत तक आते-आते अक्सर हमें कब्ज़,ख़राब मूड,रूखी त्वचा और बालों आदि की परेशानियों से दो चार होना पड़ता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमें जितना खाना चाहिए और जितनी हमारे शरीर और पेट की जरुरत है हम उससे कम खाने की कोशिश करने लगते हैं । हमारा ध्यान खाने से हटकर मुख्यतः अपनी भूख को नियंत्रित करने, कम खाने, सूप और सलाद से उस भूख को काबू में करने पर लग जाता है। वास्तव में हम सही अनुपात में भोजन नहीं करते हैं,इसका परिणाम यह होता है कि हम खाना खाना छोड़ देते हैं और उन चीज़ों को खाना शुरू कर देते हैं जिसे हम ” सामान्य” कह कर परिभाषित करते हैं, फिर से हमारा वज़न बढ़ने लगता है। और इसके बाद डाइटिंग के दौरान अपनी गलतियों को नजरअंदाज करते हुए हम अपने खाने से रोटी,दाल घी जैसी महत्वपूर्ण चीजों को हटाने लगते हैं ये सोचकर कि वजन बढ़ने का यही कारण है |

सही अनुपात में भोजन करने के अनेकों फ़ायदे हैं_

1 – पाचन क्रिया बेहतर होती है,खाना अच्छे से शरीर में मिलता है | 

2 – खाना अच्छे से पचने से आप सुबह बहुत अच्छी तरह फ्रेश होते हैं और दिन भर ऊर्जावान महसूस करते हैं 

3 – अच्छे बाल और अच्छी त्वचा

4 – शरीर में पोषक तत्वों की सही स्थिति ख़ासकर विटामिन डी, बी12,आयरन,फॉलिक एसिड के मामले में

5 – आपकी संतुष्टि का स्तर बढ़ेगा,जिसका अर्थ है कि आप खाने के बाद बेचैनी महसूस नहीं करेंगे और चाय, कॉफी, चॉकलेट या सिगरेट आदि का सहारा लेने से बचेंगे

खाने का सही अनुपात क्या है?

इस अनुपात में खाना खाने की विधि बहुत ही आसान है, यह हमारे सामूहिक ज्ञान और संस्कृति का हिस्सा है,और संपूर्ण भारत में सभी इसी तरह खाना खाते हैं | हमारी दादी,नानी भारतीय थाली की इस विधि में पारंगत होती हैं और हमेशा से इस पारम्परिक विधि की ज्ञाता रही हैं | जब आप थाली में खाना लेते हैं तो उसके आधे हिस्से को अनाज से भर देते हैं जिसमें थाली के 50 फीसदी हिस्से में चावल, चपाती,और भाकरी शामिल होती है. इनमें सभी  प्रकार के फाइबर और प्रोटीन होते हैं जोकि आपके क्षेत्र के देशी खाने होते हैं | बाकी बचे 30 फीसदी हिस्से को आप दालों, सब्ज़ियों ( मीट, अगर आप मीट खाते हैं तो ) से पूरा करते हैं,आखिर का 15 फीसदी हिस्सा चटनी, पापड़,आचार, दही, कच्ची सलाद ( अगर वो आपकी प्राथमिकता में है तो ) के लिए होता है।

आप एक ही खाने में रोटी और चावल एक साथ खा सकते हैं अगर यह सिर्फ 50 प्रतिशत है जो आप खा रहे हैं। यदि आप चावल की मात्रा से अधिक दाल का सेवन करते हैं, तो आपको घबराहट,सूजन और कब्ज का अनुभव होता है। इसलिए आपके अधिक चावल और कम दाल होनी चाहिए। आपके भोजन में अचार और पापड़ की मात्रा भी लगभग 15 प्रतिशत होनी चाहिए। 50,35 और 15  प्रतिशत के अनुपात को देखने का एक और तरीका 3: 2: 1 का अनुपात भी है। यदि आप इस तरह से प्लेट को बांटने में सक्षम हैं, तो आप हल्का खाने में कामयाब रहेंगे ,आप हल्का महसूस करना शुरू कर देंगे जिससे आप अपने वर्तमान स्थिति में अपना वज़न कम और स्किन, बालों और पोषक तत्वों की स्थिति में भी सुधार महसूस करेंगे | यह विधि हमारी शाश्वत ज्ञान से संबंधित है, हालांकि, इसे हाल ही में कनाडा में भी मान्यता दी गई थी जब उन्होंने 2020 में खाद्य गाइड को संशोधित किया और एक बयान जारी करते हुए कहा  कि यह आपके द्वारा खाए जाने वाले खाने के अनुपात के बारे में नहीं है, बल्कि उस अनुपात के बारे में है जिसमें आप अपना खाना खाते हैं। उदहारण के लिए आम धारणा यह है कि चना अच्छा स्वस्थ्य के लिए अच्छा होता है, लेकिन इसे खाने से गैस होती है, पर सच्चाई यह है कि ऐसा तब होता है जब आप इसके साथ सही मात्रा में चावल और रोटी नहीं खाते हैं। इसलिए अनुपात को सही करने की ज़रूरत है।

थाली का आकार क्या होना चाहिए?

बच्चे,बड़ों की थाली की तुलना में छोटी थालियों में खा सकते हैं थाली का आकार जो भी हो, पर अनुपात सही होना चाहिए। यहां तक कि तब भी जब बच्चे  प्रॉपर खाना नहीं भी खा रहें हों,तब भी जब इडली,डोसा,पोहा,पराठा या चीला जैसे खाने भी खा रहे हों तो,50 फीसदी अनाज, लगभग 30 से 35 फीसदी दालें और सब्जी,15 फीसदी मसाले,जड़ी-बूटियां आदि भी इसी अनुपात में होनी चाहिए।

माँसाहार कहाँ फिट होता है?

यह प्लेट के दाईं ओर आता है इसलिए यह 35 प्रतिशत स्थान से जुड़ा होता है और ये तब ठीक होता है जब ये भोजन के हिस्से के रूप में हो। अगर आप जो खा रहे हैं उसमें यह 100 या 50 से 60 प्रतिशत तक शामिल हो तो आप अपने पाचन, मूड और दूसरे क्षेत्र में समस्याएं देखनी शुरू कर देते हैं।

अनाजों में क्या शामिल है,और दाईं और बाईं और क्या आता है?

चावल, गेहूं, बाजरा, ज्वार,रागी, एक प्रकार का अनाज, अन्य स्वदेशी अनाज जैसे कोदरा,कोदू,आदि अनाज के अंतर्गत आते हैं, दाहिने तरफ, हमारे पास 65,000 दालों की किस्में हैं, एक विशाल विविधता लिए पकी हुई सब्ज़ियां,मांस थाली के  35 प्रतिशत हिस्सा के अंतर्गत आती हैं। बाकी के बचे हुए 15 फीसदी हिस्से में अचार, पापड़,चटनी, सलाद, दही और छाछ आती है | इसलिए भोजन से पहले एक गिलास पानी ज़रूर पिएँ ताकि आप अच्छी तरह से हाइड्रेटेड रहें और बीच ,दाएं,बीच, दाएं,बाएं से मेंटल मील मैप के अनुसार खा सकें,भोजन का स्वाद ले सकें और अच्छे से पचा सकें |

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