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जिस दिन शान्ति और अर्पणा की पहली मुलाकात हुई थी, उसी दिन शान्ति के सब्जी लाने वाले झोले की तन्नी टूट गयी थी। वह झोला काफी पुराना हो चुका था जिसकी तन्नी भूरे और सफेद रंग की थी। गंदगी की वजह से उसका सफेद रंग पीला पड़ गया था। शान्ति के बेटे लोहित को यह बिल्कुल भी पसंद नहीं था कि वह सामान लाने के लिए इस झोले का इस्तेमाल करे।

इसलिए उसने उसके लिए नया बैग ला दिया जो कि नीले रंग का था और उस पर पीले रंग से छोटे छोटे फूल बने हुए थे। शांति इस बैग को इस्तेमाल करने से पहले कुछ दिनों तक सोचती रही कि यह उसके साथ बेमेल लगेगा ठीक उसी तरह से जैसे कि वह अनु की तितली वाली गुलाबी रंग की क्लिप अपने सफेद बालों में लगा ले। अब वह इस बैग का इस्तेमाल तभी करती, जब अनु उसके आसपास होती। अनु हमेशा सब्जी उठाने की जिद करती, जबकि सच तो यह था कि उसकी लंबाई मुश्किल से इस बैग के बराबर होगी। इसलिए शांति कुछ ऐसी सब्जियां जो ज्यादा भारी न हों को नीले झोले में डालकर अनु को उठाने के लिए दे देती, बाकी की सब्जियां वो अपने पुराने भूरे रंग के झोले में ही लाती।

सौभाग्य की बात यह थी कि जब झोले की तन्नी टूटी तो वह घर के नजदीक ही थी। सब्जी का झोला उठाये वह अपने अपार्टमेंट की सीढ़ियां चढ़ने लगी। झोले में टमाटर सबसे उपर था। अभी वह कुछ ही सीढ़ियां चढ़ी होगी कि अधिक भार की वजह से झोले की तन्नी टूट गयी और टमाटर सीढ़ियों से लुढ़कते हुए नीचे गिर गये। वह झोले को दीवार से लगाकर सब्जियां इकट्ठी करने के लिए सीढ़ियों से नीचे चली गयी।

तभी उसने अपर्णा को देखा, जो कि नीचे गिरे हुए टमाटरों को इकट्ठा कर रही थी। अपर्णा ने शांति को अपने टमाटर भरे हाथों के साथ मुस्कराकर देखा।

शांति के सामने खड़ी लड़की या औरत ने जीन्स के साथ छोटा कुर्ता पहना हुआ था और उसने अपने बालों की पोनीटेल बनाई हुई थी, उसके कानों में सिल्वर की लंबी ईयरिंग थी। उसके होठो पर लगी लिप्स्टिक का रंग गुलाबी था और उसकी खूबूसरत आंखें काजल से सजी थीं। उसके कंधों पर एक बैग टंगा हुआ था।

हैरानी की बात यह थी कि शांति उसे पहचान नहीं पायी। उस शाम के बाद उसने अपने आप से पूछा क्या कि मैं अपर्णा को पहचान क्यों नहीं पायी क्या इससे पहले कभी भी मैंने उसका चेहरा इतने ध्यान से नहीं देखा था। अब से पहले उसने अपर्णा को हमेशा शॉट्स और टी शर्ट में ही देखा था उसके बालों का ढीला जूड़ा बना होता था और वह हमेशा लैपटॉप पर झुककर काम करती रहती। अपर्णा बची हुई सीढ़ियां चढ़कर उपर आ गयी और टमाटरों को थैले के अंदर वापस रख दिया।

थैंक यू, शांति बोली थैले की तन्नी टूट गयी और टमाटर लुढ़क कर नीचे चले गये।

ओह, अपर्णा बोली, लाइये मैं आपका बैग अंदर रख देती हूं।

बिना कुछ कहे चुपचाप शांति ने पर्स से चाबी निकालकर अपने घर का दरवाजा खोल दिया। अपर्णा सब्जियों का बैग उठाकर अंदर ले आयी और उसे उठाकर डाइनिंग टेबल के उपर रख दिया।

थैंक्यू, शांति दुबारा से बोली, उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि अपर्णा सच में उसके घर के अंदर खड़ी है। अचानक से ही वो ये सोचकर झेंप सी गई कि उसके लिविंग रूम में कितना अंधेरा है और वह कितना फॉर्मल सा है, उसे लगा कि शायद अपर्णा भी उसके बारे में कुछ ऐसा ही सोच रही होगी।

क्या मैं तुम्हें एक गिलास टैंग दूं? शांति अपर्णा से बोली, मैं हमेशा अपनी सैर से वापस आने के बाद एक गिलास टैंग पीती हूं।

नहीं आंटी, अब मुझे जाना चाहिए।

नहीं नहीं, मैं चाहती हूं कि तुम टैंग पीकर जाओ, तुमने मेरी मदद की इसके लिए मैं बस इतना ही कर पा रही हूं। शांति अपर्णा के साथ थोड़ा और समय बिताना चाहती थी। वह अपर्णा से बहुत समय से मिलना चाहती थी, लेकिन उसके साथ मुलाकात होने में इतना समय लग गया, पता नहीं फिर ऐसा मौका मिले या ना मिले, शांति उसके साथ अपनी मुलाकात को और ज्याद लम्बा बनाना चाहती थी।

पिछले कई हफ्तों से शांति अपने घर के नीचे के उस अपार्टमेंट में झांकती रहती थी, शायद उसे अपर्णा को छिपकर देखने में मजा आने लगा था। शांति ने ध्यान दिया कि वह लड़की अपना घर छोड़कर शायद ही कभी बाहर जाती थी। वह अपने दिन का अधिकांश समय लैपटॉप पर काम करते हुए ही बिताती। वह अधिकतर शॉटस और टीशर्ट पहने रहती थी। कभी कभी उसके घर में शाम के समय दोस्तों का जमावड़ा होता, उस समय उसके घर से इंग्लिश गानों और इंग्लिश में की गयी बातचीत की आवाज आती थी। यह पार्टियां रात में देर तक चलती रहतीं। कभी कभी तो जब शांति सुबह के समय जल्दी उठती, तब भी वो उन्हें आपस में बातचीत और ड्रिंक करते देखती। इसके बाद वो सब नाश्ता करने के लिए बाहर जाते और वापस आने के बाद पूरे दिन सोते रहते। शांति कभी भी इस बात का समझ नहीं पाती कि पूरी रात जागकर बातचीत करने फिर सारा दिन सोने का क्या तुक है, जिन्दगी जीने का ये कौन सा तरीका है।

लड़की के फ्लैट में आने के दो हफ्ते बाद घर में एक आदमी आया, उसके आने से पहले ही लड़की ने घर को अच्छी तरह से सेट कर लिया था। जब शांति अपनी दोपहर की झपकी के बाद उठी, तो उसने उस लड़की के घर में झांककर देखा, उस समय लड़की ने अच्छी सी ड्रेस पहनी हुई थी, इससे पहले शांति ने उसे हमेशा शॉटस और जींस में ही देखा था, उसे देखकर शांति ने सोचा शायद वो कहीं बाहर जा रही है।

जिस समय वह आदमी घर में आया, शांति ने उस लम्हे को मिस कर दिया था क्योंकि उस समय वह अपने लिविंग रूम में टीवी के आगे बैठकर अपना मनपसंद सीरियल देख रही थी। बाद में उसे इस बात का पछतावा भी हुआ, फिर जब उसने अपनी सीढ़ियों के नीचे के फ्लैट में डिनर से पहले देखा, तो उस समय वह आदमी सोफे पर आराम से लेटकर टीवी के चैनल्स सर्च कर रहा था। शांति की यादाश्त में यह पहला दिन था, जब उस घर में टीवी चल रहा था।

कुछ देर के लिए शांति ने सोचा कि क्या उसे पुलिस को कॉल करके बुलाना चाहिए? उसे यह समझ नहीं आ रहा था कि वह यह कैसे पता करे कि उस घर में एक अंजान आदमी क्या कर रहा है, उस लड़की को देखकर ऐसा तो कहीं से भी नहीं लगता कि वो शादी शुदा है। अगर वह आदमी एक रेपिस्ट या फिर खूनी हुआ तो क्या होगा, कहीं ऐसा ना हो कि वो लड़की खून से लथपथ अपने बेडरूम में पड़ी हो यह सब सोचकर उसे घबराहट हो रही थी। फिर उसने सोचा वो पागल है, जो ऐसा सोच रही है, लेकिन फिर भी उसने थोड़ी दूर और रूककर देखते रहने का फैसला किया।

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