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हाय

हेल्लो!

तुम्हारी मदद के लिए धन्यवाद।

मैं बहुत खुश हूं, हालांकि मुझे इस बात पर संदेह है कि तुम्हें मेरी मदद की ज़रूरत है।

सही पकड़ा, लेकिन इसके बावजूद धन्यवाद।

हमारे बीच यह मासूम से आदान प्रदान की शुरूआत थी, ठीक उसी तरह से जैसे कि किसी भी दोस्ती की शुरूआत होती है और समय के साथ वह बढ़ती जाती है।

हम दोनों की मुलाकात भी इत्तेफाक से ही हुई थी, हम दोनों को एक ही क्लास के लिए साथ में जाना था। दरअसल यह उसका लेक्चर था और मैं उसके साथ सहायक लेक्चरर थी। सच कहूं तो इस बात पर सवाल उठना लाजिमी था कि एक इंग्लिश के प्रोफेसर ने इकनाॅमिक्स की क्लास का चयन क्यों किया, लेकिन सच तो यह है कि वास्तविक जिन्दगी में चीजें इसी तरह से चलती हैं। उस समय मैं खाली थी, इसलिए जब मुझे इस क्लाॅस का आॅफर मिला तो मैंने स्वीकार कर लिया। हालांकि यह एक गेस्ट लेक्चर था, लेकिन अपने खाली समय को व्यस्तता में बदलने के लिहाज से यह ठीक ही था। मैंने क्लास में जाने से पहले अपना आई फोन एक्स साथ में ले लिया, जिससे कि मैं वहां की फोटो खींचकर उसे काॅलेज की वेबसाइट पर अपलोड कर सकूं। मैंने इस लेक्चर को स्वीकार करने से पहले कुछ बातों पर मन ही मन विचार किया मसलन लेक्चर का विषय अच्छा था, इस समय मैं खाली थी, इन सारी बातों के अलावा एक बात और थी, इसके लिए मुझे सारी रात जागना था और इसमें मेरी मदद काॅफी कर सकती थी।

इन सारे विचारों के साथ मैं उस कमरे में पहुंची जहां पर लेक्चर देना था। भले ही मैं इकनाॅमिक पर लेक्चर देने को तैयार थी और अब मैं क्लास में अपने विद्यार्थियों का इंतजार कर रही थी। लेकिन मेरे दिमाग में अर्थशास्त्र के नंबर, चित्र और सांख्यिकी के नियम चक्कर काट रहे थे और मुझे इन सारी बातों को अपने लेक्चर में शामिल करना था यह सब सोचकर ही मेेरे पेट में मरोड़ उठ रहे थे। मैं इस विषय से सम्बन्धि उन महान लोगों के बारे में भी सोच रही थी, जिन्होंने अर्थशास्त्र के नियमों और सूत्रों से हमारा परिचय करवाया था, मैं अपने लेक्चर में इन सभी का उल्लेख करना चाहती थी। मेरी बात सुनकर वह जोर से हंसा, फिर वह अपना गला साफ करते हुए बोला, जो अर्थशास्त्रियों ने अपने सूत्रों से किया है, इंग्लिश वाले वही अपने खूबसूरत शब्दों की जादूगरी से करते हैं।

हूं उसकी बात सुनकर मैं धीरे से मुस्कुरा दी।

क्लास के अंदर आकर स्टूडेंट्स अपनी अपनी जगह पर बैठ गये। काॅफी आ गयी, सब कुछ वैसे ही हो रहा था जैसी कि योजना बनी थी। क्लास के खतम होने के बाद नंबरों की अदला बदली उस दोपहर की योजना का हिस्सा नहीं था। वो मुझसे बोला, क्या आप मेरे पास इस सेशन की कुछ तस्वीरें भेज देंगी। दरअसल मुझे यह याद भी नहीं है कि उसने मुझसे ऐसा कहा था या यह मेरी कल्पना मात्र है।

क्योंकि मैं उसके पढ़ाने के तरीके से बहुत प्रभावित थी, उसके साथ वहां रहते हुए मैंने उसके बारे में और भी बहुत सारी बातों पर ध्यान दिया, मसलन उसे डाइबिटीज है, लेकिन मीठा बिस्किट उठाकर खाने से पहले उसने एक बार भी  नहीं सोचा, उस बिस्किट को उसने दो ही बाइट में खतम कर दिया। उसने बताया था कि वह आध्यात्मिक जरूर है, लेकिन धार्मिक नहीं है, लेकिन उसके लैपटाॅप की स्क्रिन सेवर पर आठ हाथों वाली दुर्गा मों की तस्वीर लगी थी। उसने मुझसे स्त्री स्वतंत्रता के बारे में कुछ बातें की साथ ही मुझे यह भी बताया कि किस तरह से उन्होंने अपनी बीवी को अकेले घूमने भेज दिया। सच तो यह था कि वो दुनिया के बुद्धिमान व्यक्यिों में से एक थे, लेकिन वह बहुत ही ज्यादा सरल प्रवृत्ति के थे, तभी तो वो मुझ जैसी अतिथि लेक्चरर के साथ यह सारी बातें शेयर कर रहे थे। मेेरे लिए उनके साथ क्लास शेयर करने का मौका मिलना बेहद महत्वपूर्ण बात थी।

क्लास के बाद मैं घर पर आ गयी कि तभी मैंने देखा कि मेरे मोबाइल पर उनका मैसेज था।

तुम कैसी हो?

यह सब उनके थैंक्यू कहने के बाद हुआ था क्योंकि मैंने उनके कहे अनुसार उनके पास कुछ तस्वीरें भेजी थीं। ऐसा करने के बाद मुझे घबराहट सी हो रही थी, लेकिन कुछ ही देर बाद उनका मैसेज आ गया।

मैं अच्छी हूं, और आप कैसे हैं?

बेहद औपचारिक जवाब।

बेहद आश्चर्यजनक।

हा हा, मुझे बुद्धिमान व्यक्तियों के साथ दोस्ती करना और कभी कभी कलात्मक चीजें इकट्ठी करना पसंद है।

निश्चित रूप से यह एक होर्डर है, लेकिन मैं इन दोनों में से क्या हूं बुद्धिमान या फिर कलात्मक?

अचानक से ही मैंने स्क्रीन पर लिखे शब्दों की ओर देखा बुद्धिमान और कलात्मक। यह मुझे पसंद आया। क्या मैं फ्लर्ट कर रही हूं? यह जानते हुए भी कि वो शादीशुदा है। लेकिन क्या उनके शादीशुदा होने से उनसे बातचीत करने की मनाही थी? निश्चय ही विवाहित होने के बावजूद वो एक दूसरी औरत के साथ बातचीत कर रहे थे, निश्चय ही इससे पहले भी उन्होंने दूसरी औरतों से बात की होगी। पहले उन्होंने मैसेज किया था, इसलिए उनके साथ बात करना हानिकारक नहीं था। सिवाय इस बात के कि यह विचार मुझे ज्यादा आकर्षक नहीं लगा। लेकिन किसी को भी यह बात जानने की जरूरत नहीं है, कि मैं अपने माता पिता के उस घर मंे इस वक्त अकेले हूं, उस अधेड़ उम्र के प्रोफसर के लिए तो बिल्कुल नहीं। उसे यह कभी भी नहीं पता चलना चाहिए।

जल्दी ही हम दोनों के बीच मैसेज का आदान प्रदान हाने लगा, अपनी बातचीत में हम दुनिया, समाज, राजनीति, साहित्य, संगीत कला और विश्व इकोनाॅमी के बारे में बातें करते थें, लेकिन कभी भी हमने एकदूसरे से परिवार और काम के बारे में बात नहीं की। हम दोनों ही पवित्र थे। मैंने कभी भी उनसे उनकी बीवी या फिर उनके बच्चे हैं या नहीं इस बारे में नहीं पूछा। ठीक मेरी ही तरह से उन्होंने भी कभी मुझसे मेेरे परिवार के बारे में नहीं पूछा। वो मेेरे पेरेंट्स, पूर्व के साथियों या वर्तमान के प्रेमियों के बारे मंे बहुत कम जानते थे। सच कहूं तो हम दोनों का सम्बन्ध अभी भी एक दायरे में बंधा हुआ था।

मैं यह सोचती क्या कभी ऐसा भी हो सकता है कि हम दोनों एकदूसरे के सच्चे साथी बन सकते हैं।

उन्होंने मुझे दोपहर को मैसेज किया, जो कि मेरे लिए अप्रत्याशित समय था। जल्दी।

मैं अपने लेक्चर हाॅल के बाहर के बरामदे में खड़ी थी, मैंने कुछ देर तक अपने फोन की स्क्रीन की ओर देखा। मैं अपने क्लास के अंदर जाने ही वाली थी। मैंने अपने फोन पर आये मैसेज का जवाब देने के लिए अपने शब्दों को आध्यात्मिक बनाने का फैसला किया।

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