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हमें ठीक से ये मालूम नहीं है कि सचिन ने पहली बार कब क्रिकेट का हाथ थामा था लेकिन हम सभी को उनकी एक तस्वीर याद है जिसमें वो 3 साल की उम्र में अपने घुंघराले बालों और फूले हुए गालों के साथ बल्ला थामे खड़े दिखते हैं. छः साल की उम्र तक आते-आते वो बांद्रा की साहित्य सहवास कॉलोनी में लड़कों के साथ खेलने लगा था. 11 साल की उम्र में सचिन की रमाकांत आचरेकर के शिवाजी पार्क स्थितकैम्प में ट्रेनिंग शुरू हुई. 12 साल की उम्र में शारदाश्रम विद्यामंदिर के लिए पहली बार जूनियर क्रिकेट मैच खेला. और पंद्रह साल की उम्र में सचिन मुंबई के लिए रणजी ट्रॉफी खेल रहा था. बड़े आराम से इंडियन क्रिकेट में एक सचिन को बचपन से ही विलक्षण प्रतिभा का मालिक कहा जा सकता है. मेरे ख्याल में दुनिया भर के खेलों में सचिन से बड़ी ऐसी कोई हस्ती नहीं मौजूद रही.

11 दिसंबर 1988 को दफ्तर की एडिटोरियल मीटिंग दोपहर तक ख़त्म हो गई. मैं असमंजस में था. वानखेड़े के मैदान में मुंबई रणजी ट्रॉफी में गुजरात के खिलाफ़ खेल रही थी. ये मेरे ऑफिस से कुछ ही किलोमीटर दूर था. सामान्य दिनों में एक डोमेस्टिक क्रिकेट मैच शायद किसी का ध्यान खींचता. लेकिन ये वो रेगुलर मैच नहीं था. मुंबई के लिए एक पंद्रह साल का लड़का पहला मैच खेलने जा रहा था. ये लड़का सबसे एक ऐसे शहर के लिए सबसे कम उम्र में क्रिकेट के लिए खेलने जा रहा था जिसकी क्रिकेट में अपनी ही एक परम्परा है. इसीलिए मैंने अपने एडिटर डेरिल डीमोंटे को पहले ही ये सुझाव दे दिया था कि मुझे इस मैच को कवर करने के लिए भेजा जाए. उन्होंने मुझे याद दिलाया, “लेकिन पहले से हमारा एक स्पोर्ट्स रिपोर्टर मैदान पर है.” मैंने धीरे से कहा, “लेकिन ऐसा भी तो हो सकता है कि मैं उस लड़के के बारे में कलर स्टोरी लिख दूं जो 15 साल की उम्र में अपना पहला मैच खेलने जा रहा है.” डेरिल हालांकि क्रिकेट के बारे में इस कदर उत्साह नहीं दिखाता था लेकिन वो अंत में तैयार हो गया. उसे शायद मेरे ऊपर दया आ गई थी क्यूंकि मैं पश्चिम अफ्रीका में पड़ते सूखे पर संपादकीय लिखते खीज चुका था.

जब मैं वानखेड़े स्टेडियम पहुंचा, सचिन रमेश तेंदुलकर पहली बार फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में बैटिंग करने के लिए पिच की ओर कदम बढ़ा रहा था. सभी स्टैंड्स खाली थे. लेकिन फिर भी हवा में कुछ उत्साह भरी सुगबुआहट सी थी. प्रेस बॉक्स के ठीक बगल में वीआईपी बैठते हैं. वहां उस वक़्त कई पूर्व मुंबई और इंडियन क्रिकेटर्स बैठे थे. सुनील गावस्कर स्टैंड्स में बैठे हुए थे. वो पिछले दो दशकों से मुंबई क्रिकेट के मसीहा बने हुए थे लेकिन अब वो भारतीय क्रिकेट के नए भगवान का जन्म होता देखने वाले थे. शारदाश्रम विद्यामंदिर से तेंदुलकर के दोस्त आये हुए थे जिन्हें उस दिन स्कूल ने छुट्टी दी हुई थी जिससे वो अपने दोस्त की हौसलाफज़ाई कर सकें. हर कोई यही कह रहा था, “सचिन नक्की शंभर करणार. (सचिन पक्का हंड्रेड मारेगा)” मराठी में सौ को शंभर कहते हैं. मुंबई के हर मैदान में शंभर की गूँज सुनाई दी है और किसी बल्लेबाज के लिए शंभर क्रिकेट के खेल में सबसे बड़ी कला का सूचक होता है.

गुजरात की बॉलिंग कोई बहुत ख़ास नहीं थी. लेकिन वो सचिन को हल्के में भी नहीं लेने वाले थे. पहले ही ओवर में तेंदुलकर के पैड पर गेंद लगी. करीबी एलबीडब्लू फ़ैसला जो सचिन के पक्ष में गया. शायद अम्पायर खुद एक इतना से छोटे खिलाड़ी को खेलते देखने का चांस मिस नहीं करना चाहता था. जैसे ही तेंदुलकर की आंखें जमीं, तेंदुलकर ने बॉलिंग की धज्जियां उडानी शुरू की. तेंदुलकर वैसे ही खेलने लगा जैसे खेलते हुए उसने स्कूल रिकॉर्ड्स में तबाही मचा दी थी. वो गेंद को मैदान के हर कोने में पंहुचा रहा था. ऐसा लग रहा था जैसे एक छोटे से मैदान में खेलते हुए इतने बड़े स्टेज पर एके खेलना दुनिया का सबसे आसान काम था. ऐलेन सिप्पी, तेंदुलकर के उस वक़्त बैटिंग पार्टनर एक मज़ेदार बात याद करते हैं, “मुझे याद है कि मैच के ठीक एक दिन पहले मैं अपने पापा से कह रहा था कि न जाने क्यूं सेलेक्टर्स ने एक पंद्रह साल के लड़के को सेलेक्ट कर लिया है. उसे चोट लग जाएगी. अगले दिन मुझे मालूम चला कि सचिन दूसरे ग्रह से आया हुआ है.”

जब सचिन बैटिंग करने के लिए आया, सिप्पी ने बतौर सीनियर प्लेयर सचिन के पास जाकर सलाह दी, “रिलैक्स. आराम से. मुझे लगा था सचिन शुरुआत में थोड़ा बेचैन तो होगा ही लेकिन सचिन ने मुझे एक ही शब्द में जवाब दे दिया, “बिंदास.” और फिर वो जाकर गेंद को इतनी ज़ोर मारने लगा कि मेरी बोलती बंद हो गई.”  सच में, एक लड़का जिसके घुंघराले बाल दूर से ही उसकी पहचान ज़ाहिर कर देते थे और जिसने शायद अभी तक एक भी बार दाढ़ी भी नहीं बनाई थी और जो सच में बिंदास था. बिंदास यानी मुंबई का शब्द जिसका मतलब होता है बिना डरे ज़िन्दगी को जीना. उसके हर शॉट के साथ उसके दोस्तों की तालियां और तेज़ होती जा रही थीं. और जैसे-जैसे स्कोर बढ़ रहा था, स्टैंड्स भरते जा रहे थे.

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