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अखिलेश शर्मा की कहानी स्टेबिलिटी  ‘ हैप्पी एंडिंग ‘ कहानी प्रतियोगिता की विजेता कहानी रही है. हमने अखिलेश शर्मा से उनके कहानी लेखन और आने वाली रचनाओं तथा हिंदी साहित्य की बारीकियों पर चर्चा की. 

अखिलेश शर्मा आपकी कहानी स्टेबिलिटी को “ हैप्पी एंडिंग ” कहानी प्रतियोगिता का विजेता चुना गया है, कहानी के बारे में थोड़ा सा विस्तार से बताएं.

कहानी में दो ही पात्र हैं- अनिहिता और हरि. परंतु कई और पात्र सूक्ष्म रूप से साथ साथ चलते दिखाई देते हैं (इन्हें काल समाज स्थिति भी कह सकते हैं), जैसे किसी आम युवा द्वारा भविष्य बनाने की जी तोड़ कोशिशें, उसकी पराजयें एक रेलगाड़ी (जो प्रतीक है उन्मुक्तता, बेलौसी, गति और जिंदगी की).

अनिहिता, हरि की जद्दोजहद के साथ है, परंतु अंदर मन में इस बात का महत्व भी जानती है कि प्रेम को मुल्तवी कर कर के जीना कहीं ज्यादा दुखदायी और यातनापूर्ण है. अनिहिता के फलसफे का पलड़ा इस तरफ ज़्यादा झुका हुआ है कि प्रेम में जीने की उपलब्धता और सौभाग्यता किसी भी सांसारिक व भौतिक चीज की सहूलियत और उपस्थिति से कहीं ज्यादा सुख देने वाली है.

जिस दिन का जिक्र कहानी में है शायद वो अनिहिता के इंतजार करते रहने की हताशा का परम दिन है (इसे इस बात ने भी हवा दी है कि आने वाले रविवार को अनिहिता को विवाह के लिए देखने एक लड़का आ रहा है).अब अनिहिता के वर्तमान और भविष्य का कुछ भी बने, फिलहाल उसे तो बस इस अनिश्चितता और भविष्य.भविष्य के जाप से बाहर निकलना है. अनिहिता के बेलौस पन से यह भान होता है कि प्रेम को प्रेम की तरह से जीने की इच्छा का उसका ‘वेटिंग फ़ॉर गोदो’ का उच्चतम बिंदु आ चुका है। और दूसरी तरफ हरि अभी भी ‘एक बार स्टेबिलिटी हो जाये तब सिर्फ प्रेम करूंगा’ वाली मनोदशा में है.

लेकिन प्रेम में प्रेमी को खो देने का ख्याल सब भावों, योजनाओं, कैलकुलेशन्स पर भारी पड़ ही जाता है.अंत में यही होता है.

इस कहानी के लिखे जाने की भी एक कहानी है.जितनी भी कहानियां मैं लिख लिख कर रखता रहता हूं लगभग सभी बीस तीस हजार शब्दों से कम में हो ही नहीं रही थी, कुछ तो इस संख्या से भी दोगुनी. तब जगरनॉट का यह कॉन्टेस्ट सामने आया। इसमें जो सिर्फ दो हजार शब्दों की सीमा दी हुई थी, बस वही मुझे अपील कर गयी.

अपनी इतनी लंबी लंबी कहानियों से मैं परेशान हो चला था सो मैंने सभी दिए हुए कॉन्टेस्ट के लिए दो दो हजार शब्दों में कहानी खत्म करने को अपने लिए एक नए अभ्यास के तौर पर लिया. कहानी लिखने में जितना समय लगा उसका चार गुना समय उसकी काट छांट करके उसे दो हजार शब्दों का बनाने में लगा. इसमें से सिर्फ तीन मैंने जगरनॉट के लिए भेजीं.

क्या प्रेम कहानी लिखने के लिए आप कोई विशेष नियम फॉलो करते हैं?

कोई नियम नहीं. सुबह से रात तक लगातार लिखते रहो, यदि कागज कलम से नहीं लिख पा रहे तो खुले दिमाग से, बंद ज़बान से भीतर ही भीतर लिखते रहो. लिखने का सिर्फ एक ही नियम है कि हर समय लिखते रहो और लिखने के मुक़ाबले कई गुना ज्यादा पढ़ना तो बहुत जरूरी है ही.

लेखक बनने के लिए कैसे सोचा? आप लिखने की प्रेरणा कहाँ से पाते हैं ?

पढ़ने की आदत बचपन से रही है. सारी पढ़ाई विज्ञान की हुई है और दिल साहित्य में समान रूप से रमता रहा है. सारा नहीं तो बहुत कुछ पढ़ने समझने की कोशिश भी करता रहा हूं. कई बार प्रयास किए कि बाक़ायदा बैठ कर लिखा जाए,परंतु संभव ही नहीं हो पाया था. एक दो बार एडहॉक तरीके से कहानी लिख कर एकाध जगह पढ़ने के लिए भेजी भी, लेकिन रिजेक्ट हुआ ( स्वाभाविक रूप से मेरा एडहॉकपना फट से पकड़ में आ गया होगा, पाठक लेखक से ज्यादा समझदार होता है).एक समय फिर ऐसी स्थितियाँ बनीं, जब लगा कि अब लिखना ही अंतिम उपाय है तो बैठ गया पेन लेकर.

रही बात प्रेरणा की तो ऐसी तमाम विसंगतियां दिखाई पड़ती ही हैं, जो आपको हॉन्ट करती है .ये विसंगतियां ही प्रेरणा होती हैं.

कौन सी ऐसी रचना और लेखक हैं जोकि आपके दिल के सबसे करीब हैं?

इतना विपुल हिंदी साहित्य और उसका इतिहास है कि मेरी ही सीमाएं हैं कि सब कुछ पढ़ समझ नहीं सकता. ऐसी तो कई रचनाएं और लेखक हैं, किन्हीं दो चार का नाम लेना संभव नहीं है. कभी प्रेमचंद सहारा देते हैं, कभी कृष्णा सोबती जी साथ देती हैं, कभी निर्मल वर्मा, कभी मुक्तिबोध, कभी परसाई, कभी काफ्का, कभी दोस्तोयेव्स्की, कभी चेखव, कभी लोहिया, कभी गांधी, कभी मीर.मेरा मानना है कि शायद अपने दिल के करीब हम उस रचना को मानते हैं जो हमारे मन की उथलपुथल को विराम देती है या हमारे कई प्रश्नों का जवाब देती है. किसी रचना की पहली शर्त है कि उसमें एक पॉलिटिकल सेंस मौजूद रहे, जो लगातार आपसे पूछती रहे (मुक्तिबोध के अंदाज़ में) – ‘पार्टनर तुम्हारी पॉलिटिक्स क्या है’. हां, भारतीय ज्ञानपीठ से कुमार अंबुज जी की कहानियों की किताब ‘इच्छाएं‘ मैं कई बार पढ़ चुका हूं और जब भी मौक़ा होता है तो इसी किताब के पास लौटता हूं. अभी मुराकामी और स्टीफन हॉकिंग की एक एक किताब शुरू कर रखी है. वैसे गणित मेरा पसंदीदा विषय है, उसमें और फ़िजिक्स में मैं कई कई दिनों तक मशगूल रह लेता हूं.

आपकी आने वाली कहानियां-रचना कौन कौन सी हैं?

अभी क्या कहूं. मैंने कोई रचना कहीं भेजी ही नहीं. कई लिखी रखी हैं, सोचता हूं अब भेजना शुरू करूं, यदि अपने आलसीपन से छुटकारा पा सका तो. आपने पूछा था कि अपने बारे में दो चार quirky पंक्तियां बताऊं –  quirky ; हिंदी में इसे विचित्र, अप्रत्याशित जैसा कुछ कह सकते हैं। विचित्र यह है कि बाजार, राजनीतिक आतंकवाद और लूट खसोट के इस महाटुच्चे समय में हम आस्थावान हैं और अप्रत्याशित यह कि जब शब्द अपने मासूम और वास्तविक अर्थ खो चुके हैं या मानी बदल चुके हैं, हम लिख रहे हैं.

अखिलेश शर्मा की कहानी को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें 

 

 

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