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पौराणिक कथा ( कहानी ) प्रतियोगिता: की विजेता कहानी, मुकुंदा का शाप रही, कहानी की लेखिका,मैसूर की रहने वाली प्रत्याशा  नितिनएक उभरती हुई लेखिका है।  उन्होंने महिलाओं के मुद्दों पर लेख और ब्लॉग-पोस्ट लिखे हैं। वह कहानी कहने के लिए भावुक है और मानती है कि विचारों और आदर्शों को व्यक्त करने के लिए यह एक शक्तिशाली माध्यम है। वह नियमित रूप से प्रज्ञाता पत्रिका में लघु कथाएं (हिंदी और अंग्रेजी) में लिखती हैं . पढ़िए, इस हफ़्ते जगरनॉट की सम्पादक टीम की प्रत्याशा नितिन से हुई  बातचीत_

प्रत्याशा  नितिन आपकी कहानी ‘मुकुंदा का श्राप’ को  “पौराणिक कथा ( कहानी ) प्रतियोगिता”  का विजेता चुना गया है, कहानी के बारे में विस्तार से बताएं.

मुकुंदा का शाप कहानी गणेश पुराण के उपासना खंड में मिलने वाली राजा रुक्मांगद की कहानी पर आधारित है | ये कहानी ब्रह्मा ऋषि व्यास को सुनाते हैं | असल में कहानी की शुरुआत राजा भीम से होती है जिनका कोई पुत्र नहीं होता | ब्रह्मा व्यास जी को बताते हैं कि कैसे भीम को कई साल गणपति की साधना करने के बाद पुत्र के रूप में रुक्मांगद की प्राप्ति होती है | रुक्मांगद बड़े होकर एक न्यायप्रिय, और सभी शास्त्रों में निपुण राजा बनते हैं | एक दिन जब वो आखेट के लिए जाते हैं तब थकान के कारण वे ऋषि वाचक्नवी के आश्रम में आराम के लिए ठहरते हैं | ऋषिपत्नी मुकुंदा उन पर मोहित हो जाती है और उन्हें अपने साथ संबंध बनाने के लिए उकसाती है | परन्तु धर्म का ज्ञान रखने वाले रुक्मांगद इसके लिए साफ मना कर देते हैं और गुस्से में आकर मुकुंदा उन्हें कुष्ठ रोगी हो जाने का शाप दे देती है | ऐसी भयंकर अवस्था में रुक्मांगद वापस अपने राज्य जाने के बजाय निर्जल उपवास रहकर अपना शरीर त्यागने का निर्णय ले लेते हैं |

मैंने इस कहानी को रुक्मांगद या मुकुंदा के दृष्टिकोण से लिखने के बजाय एक अलग ही दृष्टिकोण से लिखने का प्रयास किया है | एक राज्य के राजा का अचानक से गायब हो जाना एक बहुत बड़ी घटना है | ऐसा होने पर सबसे पहला सवाल उस राजा के अंगरक्षकों पर उठता है कि कैसे उनके रहते राजा गायब हो गए | इस कारण मैंने अपनी कल्पना के आधार पर एक नए पात्र चारुबाहू के दृष्टिकोण से इस कहानी को लिखा | कहानी में चारुबाहू रुक्मांगद के बहुत ही निष्ठावान अंगरक्षक और बचपन के मित्र हैं | उनके महाराज के यूँ गायब हो जाने से उनके मन में क्या विचार आये होंगे इस पर मैंने ध्यान दिया है | जरूर उनके मन में अपनी असफलता का गुस्सा होगा, महाराज के लिए चिंता होगी, साथ ही उनके यूँ गायब हो जाने के पीछे का रहस्य जानने की उत्सुकता होगी, और जब महाराज मिलें  तो उनकी अवस्था देख मन में एक संघर्ष भी चला होगा | इन्हीं सारी भावनाओं को मैंने अपनी इस कहानी में दर्शाने की कोशिश की है |

 क्या आप पौराणिक कथा लिखने के लिए किसी तरह की पृष्ठभूमि बनाती है?

पौराणिक कथा को एक नए रूप में लिखने का “मुकुंदा का शाप” मेरा पहला प्रयास था | मुझे लगता है कि पृष्ठभूमि तो पौराणिक कथा अपने आप में ही है क्योंकि उस पर ही हमारी कहानी आधारित है | कहानी लिखते समय मेरा उद्देश्य सिर्फ इतना था कि मैं मूल कहानी के सार से किसी भी तरह की छेड़छाड़ ना करूँ | मैंने कई लेखकों की पौराणिक कहानियों पर आधारित कहानियाँ पढ़ी हैं और कई बार महसूस किया है कि वे कहानी के सार को ही बदल डालते हैं | मुझे लगता है कि ऐसा करने से बेहतर है कि हम अलग पात्रों को लेकर एक अलग ही कहानी लिख डालें | पौराणिक कहानियों का अपना एक महत्व है और अगर हम उनके सार से छेड़छाड़ करते हैं तो कहीं ना कहीं हम उस कथा और उसे लिखने वाले के साथ अन्याय कर रहे हैं | इस कारण इस कहानी को लिखते समय मेरा सबसे पहला उद्देश्य ये था कि कहानी का सार वही  रहे बस इसे एक अलग नज़रिए से लिखा जाए | साथ ही साथ मैं उन पात्रों को उसी प्रकार से दर्शाना चाहती थी जैसे कि उन्हें इस कथाओं में दर्शाया गया है | वो लोग, उनकी सोच, उनके निर्णय लेने का तरीका, ये सब हमारी सोच और हमारे तरीकों से बिल्कुल अलग रहा होगा तो ऐसे में मेरा प्रयास था कि मेरी सोच उन पात्रों की सोच पर हावी ना हो |

कहानी लेखन किस तरह आरंभ किया और कैसे लेखन से जुड़ी?

बचपन से ही मेरे मन में अलग अलग तरह की कहानियाँ चलती रहती थीं | किसी भी परिस्थिति को लेकर मेरे मन में कई तरह की कल्पनाएँ चलते रहना मेरे लिए एक साधारण बात थी जिस पर मैंने पहले कभी ज़्यादा ध्यान नहीं दिया था | टीवी पर आने वाले धारावाहिकों की कहानियों को भी मैं अपने मन में अलग अलग तरह से चला कर देखती थी |  पहली बार अपने मन में चल रही इन कहानियों को लिखने का विचार मुझे २०१३ में आया | मेरे पति ने भी मुझे लिखने के लिए काफी प्रोत्साहित किया | मैंने अपना पहला नॉवेल लगभग पंद्रह दिन में लिख डाला था पर उसे कभी प्रकाशित नहीं किया क्योंकि मैं खुद उस कहानी से संतुष्ट नहीं थी | उसके बाद मैंने कुछ और आधी अधूरी कहानियाँ लिखीं जो अभी भी आधी अधूरी ही हैं |

मेरे लिखने के तरीके में काफी समस्याएं थी जिसकी समझ मुझे तब हुई जब मुझे एक फिक्शन राइटिंग का ऑनलाइन कोर्स ज्वाइन करने का मौका मिला | उसके बाद मेरे कहानियों को रूप देने के तरीके में काफी परिवर्तन आया | हाल ही में मैंने वापस अपने पहले उपन्यास को दोबारा लिखा है और साथ ही कई छोटी कहानियाँ भी लिखी हैं जिनमें से कुछ प्रज्ञाता नाम की ऑनलाइन मैगजीन में प्रकाशित हुई हैं |

जगरनॉट लेखन मंच पर कहानी लिखने का अनुभव कैसा रहा?

जगरनॉट नए लेखकों के लिए एक बहुत ही अच्छा मंच है | अपनी कहानी को प्रकाशित करना बहुत ही आसान रहा | बिना किसी समस्या के मैं कहानी को प्रकाशित कर पायी और साथ ही बाद में कुछ बदलाव भी किये जो आसानी से हो गए | मैं जगरनॉट टीम को लेखकों के लिए ऐसा सुविधाजनक मंच प्रदान करने और उन्हें प्रोत्साहित करने वाली प्रतियोगिताएं आयोजत करने के लिए धन्यवाद देती हूँ |

 हिंदी में आपकी पसंदीदा कहानी या उपन्यास कौन-कौन से हैं और क्यों?

मैंने हिंदी में बहुत से उपन्यास नहीं पढ़े हैं | स्कूल में कुछ प्रेमचंद जी की लिखी छोटी कहानियाँ पढ़ी थीं | ज्यादातर मैंने इंग्लिश उपन्यास ही पढ़े हैं | शायद इसका कारण यह था कि हिंदी में उपन्यास पढ़ने का मेरा कभी कुछ ख़ास मन नहीं हुआ | संयोग की बात है कि पिछले साल जब मैंने अपनी सास के पढ़ने के लिए सी. के. नागराज राव जी के कन्नड़ उपन्यास पट्टमहादेवी शान्तला को ऑनलाइन आर्डर किया तो गलती से उसका हिंदी अनुवाद आर्डर हो गया | मैंने उसे लौटाने के बजाय उसे पढ़ने का निर्णय लिया और वो मुझे इतना रोचक लगा कि मैंने उसके बाकी भाग भी मंगाए और पढ़े | कह सकते हैं कि इसी उपन्यास को पढ़ने के बाद मेरे मन में हिंदी में कहानियाँ लिखने की इच्छा जागी | मुझे लगता है कि अपनी भाषा में अपने विचारों को अभिव्यक्त करना ज़्यादा सरल है और साथ ही जो अपनापन अपनी भाषा को पढ़ने में हैं वो किसी और में नहीं | आजकल मैं प्रेमचंद जी का उपन्यास “रंगभूमि” पढ़ रही हूँ |

मुकुंदा का शाप पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें 

 

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