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तनाव का आपके बाहर की किसी भी चीज़ से कोई लेना-देना नहीं है,यह आपके अंदर से ही जन्म लेता है |

बाहर आप हमेशा केवल एक बहाना ढूंढते हैं क्योंकि बिना किसी कारण के आपके चेहरे पर तनाव दिखना बहुत मूर्खतापूर्ण लगता है। तनाव को तर्कसंगत दिखने और बताने के लिए आप बाहर खुद को समझाने के लिए कुछ बहाने ढूंढ़ते हैं ताकि आप बता सकें कि आप चिंताग्रस्त क्यों हैं | सभी तनावों की जड़ निरंतर किसी से तुलना करते रहना है कि कोई किस स्थिति में रह रहा है?

तनाव आपके बाहर नहीं है,यह आपकी गलत जीवनशैली में है | आप होड़,प्रतिद्वन्दता में जी रहे हैं जो तनाव पैदा करता है  | आप लगातार तुलना में जी रहे हैं- जो तनाव पैदा करेगा | आप हमेशा अतीत और भविष्य के बारे में सोचकर वर्त्तमान को जीना भूल गए हैं जो कि सच्चाई है – जो तनाव पैदा करेगा |
यह सामान्य समझ का प्रश्न है; किसी से  प्रतिस्पर्धा करने की जरुरत नहीं है | आप स्वयं में जैसे भी हैं,आप पूरी तरह से अच्छे हैं।

खुद को स्वीकार करें

यही एक रास्ता है जो आपका जीवन आपसे चाहता है | कुछ पेड़ बड़े होते हैं;कुछ छोटे | लेकिन न तो छोटे पेड़ तनाव में रहते हैं न बड़े पेड़ अहंकार में | जिंदगी में विविधता की जरुरत होती है | कोई आपसे ज्यादा है;कोई आपसे ज्यादा बुद्धिमान – लेकिन कुछ बातों में आप किसी से ज्यादा गुणवान,प्रतिभावान होंगे |
बस आप अपना गुण,अपनी प्रतिभा खोजिए | प्रकृति कभी भी किसी भी व्यक्ति को बिना किसी विशिष्ट उपहार के नहीं भेजती है। बस एक छोटी सी खोज शायद आप देश के राष्ट्रपति से बेहतर बांसुरी बजा सकते हैं, एक राष्ट्रपति हो सकता है – आप राष्ट्रपति होने से बेहतर बांसुरीवादक हैं |
यहाँ तुलना का प्रश्न ही नहीं उठता | तुलना व्यक्ति को भटकाव की ओर ले जाती है | प्रतिस्पर्धा उन्हें हमेशा तनावपूर्ण रखती है और चूँकि उनके जीवन में खालीपन है इसलिए वो वर्तमान के सुनहरे क्षण को नहीं जी पाते | वे बस अतीत के बारे में सोचते हैं, जो अब है ही नहीं और भविष्य की योजना बनाते हैं जो अभी आया ही नहीं |
यह सारी चीजें व्यक्ति को असामान्य,पागल बना देती हैं | अन्यथा इसकी कोई जरुरत नहीं है : कोई जानवर पागल नहीं होता;किसी पेड़ को मनोविश्लेषण की जरुरत नहीं होती | इंसान को छोड़कर ईश्वर की सारी सजीव चीजें लगातार उत्सव में जी रही हैं | इंसान अकेला,चिंतित,उदास बैठा रहता है |
एक छोटा सा जीवन और आप उसे लगातार खोते हुए मृत्यु के करीब जा रहे हैं | यह और भी अधिक क्रोध पैदा करता है, ,मौत नजदीक आ रही है और मैंने अब तक जीना शुरू नहीं किया है | ‘ अधिकांश लोगों को केवल तभी एहसास होता है जब वे मर जाते हैं कि वे जीवित थे लेकिन तब बहुत देर हो चुकी होती है।

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