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हमें ठीक से ये मालूम नहीं है कि सचिन ने पहली बार कब क्रिकेट का हाथ थामा था लेकिन हम सभी को उनकी एक तस्वीर याद है जिसमें वो साल की उम्र में अपने घुंघराले बालों और फूले हुए गालों के साथ बल्ला थामे खड़े दिखते हैं. छह साल की उम्र तक आते-आते वो बांद्रा की साहित्य सहवास कॉलोनी में लड़कों के साथ खेलने लगा था. 11 साल की उम्र में सचिन की रमाकांत आचरेकर के शिवाजी पार्क स्थित कैंप में ट्रेनिंग शुरू हुई. 12 साल की उम्र में शारदाश्रम विद्यामंदिर के लिए पहली बार जूनियर क्रिकेट मैच खेला. और पंद्रह साल की उम्र में सचिन मुंबई के लिए रणजी ट्रॉफी खेल रहा था. बड़े आराम से इंडियन क्रिकेट में एक सचिन को बचपन से ही विलक्षण प्रतिभा का मालिक कहा जा सकता है. मेरे ख्याल में दुनिया भर के खेलों में सचिन से बड़ी ऐसी कोई हस्ती नहीं मौजूद रही.  

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सचिन असल में सबसे बेहतर
, एकदम आम सा रहने वाला, मिडल क्लास का लड़का था जिसे पूरी दुनिया में पहचान मिल रही थी. एक नई ऊर्जा से बढ़ रहे भारत की सबसे बड़ी आशा. ऐड-फ़िल्म्स बनाने वाले प्रह्लाद कक्कड़ ने कभी सचिन के साथ पहला पेप्सी का ऐड बनाया था. उन्हें एकदम ठीक से याद है कि सचिन कैमरे के सामने आते वक़्त किस कदर शर्मा रहे थे और असहज थे. “मुझे याद है कि मैंने मज़ाक में सचिन को बोला कि उसे ऐड में एक लड़की के कंधे पर हाथ रखना होगा. वो तुरंत नर्वस हो गया था. मुझे बताना पड़ा कि मैं मज़ाक कर रहा था. एक और ऐड के दौरान उसने देखा कि हमारा पूरा क्रू पेप्सी पी रहा था, वो आया और उसने पूछा कि क्या उसे भी एक मिल सकती है!”

तेंदुलकर के लिए भी अपने साथियों से मिलने वाला सम्मान उन्हें हमेशा याद रहेगा. तेंदुलकर के घर पर उनके बार में सबसे ज़्यादा सम्मानित जगह उस शैम्पेन की बोतल को मिली है जिसपर वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम के साइन हैं. वो याद करते हुए बताते हैं, “ये पहली बोतल थी जो हमने वर्ल्ड कप जीतने के बाद खोली थी.” वो बोतल उन्हें मुंबई की उस सुनहरी शाम की याद दिलाती है जब बचपन में देखा गया एक ख्वाब क्रिकेट के सबसे बड़े स्टेज पर पूरा हुआ था. वो ख्वाब जो एक छोटे से बच्चे ने अपने जादुई बल्ले को हाथ में पकड़े हुए देखा था.

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