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अपनी किताब के शीर्षक  “मुन्तशिर ” के बारे में कुछ बताएं, इस शीर्षक को चुनने की क्या वजह थी ?

मुन्तशिर का मतलब होता है बिखरा हुआ या बेतरतीब. इस छोटे से संकलन में पिरोयी गयी सभी रचनाएं, अलग-अलग समय में, अलग-अलग भाव में लिखी गयी थीं. जिनको मैंने एक जगह इकट्ठा कर दिया है. इसलिए उनके बीच आपको कोई तार नहीं मिलेगा. हर एक ग़ज़ल अपने में एक मोती है पर इन मोतियों ने मिल कर माला बनाई  है.

लेखक बनने के पीछे क्या प्रेरणा रही है?

लेखक बनने की प्रेरणा मैंने पाई अपने घर से, माँ-पापा दोनों को ही हमेशा से पढ़ने का बहुत शौक रहा. बचपन से ही किताबों, उपन्यासों और पत्रिकाओं से साबका रहा. माँ और भाई तो यदा-कदा लिखते भी हैं. बस ऐसे ही पढ़ते-पढ़ते एक दिन क़लम चल पड़ी. फ़िर माँ, पापा और भाई के प्रोत्साहन से मैं लिखता रहा.

आप ग़ज़ल/शायरी का आने वाले समय में क्या भविष्य देखते हैं ?

ग़ज़ल / शायरी के प्रति लोगों का, खासकर युवाओं का लगाव तो हाल के वर्षों में बढ़ा है. इसकी सबसे बड़ी वजह हैं युवा लेखकों की नयी पौध जिन्होंने हिंदी में कहानी और कविताओं की रचना कर उसे लोक्रप्रिय बनाया. और जगरनॉट बुक्स एवं रेख़्ता जैसे मंच ने इसे आवाम तक पहुंचाया, सुलभ बनाया, मुझे उम्मीद है कि अभी ये सफ़र और भी नए मकाम देखेगा.

शायरी/ ग़ज़ल लिखने के लिए एक कवि/कवित्री के लिए सबसे अहम चीज़ क्या होती है ?

किसी भी तरह के लेखन के लिए सबसे अहम् चीज़ है उसका समसामयिक होना. उसका लोगों से जुड़ना. और इसके लिए ज़रूरी है कि एक लेखक/लेखिका को अपने आस-पास के समाज की, उसकी संरचना की, लोगों की और उनकी भावनाओं की समझ हो. इसी समझ को फ़िर शब्दों के माध्यम से शायरी/ग़ज़ल में बाँधा जाता है.

आपके लेखन के लिए जगरनॉट का राइटिंग प्लेटफॉर्म कितना कारगर साबित हुआ ?

किसी भी कलाकार के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार होता है उसकी कला का तमाम लोगो तक पहुंचना. मैंने भी इसकी काफ़ी कोशिशें की थी. मेरी कुछेक रचनाएं प्रकाशित हुई भी थीं. और मैं टुकड़ों में कुछ-कुछ अपने ब्लॉग पे भी लिखता रहता था. फिर मेरे भाई से मुझे जगरनॉट बुक्स के बारे में पता चला. बस हिम्मत करके मैंने कुछ ग़ज़लें चुनी और प्रकाशन के लिए भेज दीं. जगरनॉट बुक्स के माध्यम से मेरी रचना लोगों तक पहुंचेगी. ये एक बहुत बड़ा सम्मान है.

शायरी में आपके पसंदीदा कवि / कवित्री कौन है और क्यों ?

काफी बड़ी सूची है. पर जिनका मेरे ज़ेहन पर और मेरे लेखन पर काफ़ी असर रहा उनमें रामधारी सिंह दिनकर, हरिवंश राय बच्चन, निदा फ़ाज़ली, राहत इंदौरी, बशीर बद्र, गुलज़ार, जावेद अख्तर का नाम प्रमुख है. इन सभी को पढ़ के एहसास होता है कि आप कुछ अमीर हो गए, थोड़ा और भर गए. इनकी रचनाओं में दर्शन है और साधारण समझ भी.

आप पाठकों के साथ कुछ सुझाव साझा करना चाहेंगे ?

पढ़ना एक अच्छी आदत है पर इस बात का ख्याल रखना बहुत अहम् है कि हम क्या पढ़ रहे हैं. क्योंकि शब्दों से ही विचार बनते हैं और विचारों से ही शख्सियत तैयार होती है.

प्रशान्त की किताब मुन्तशिर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

 

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