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लेखन मंच पर हमारी इस हफ़्ते की लेखिका का परिचय कम शब्दों में देना मुश्किल हैं,इतना कह सकते हैं कि तनिमा तिवारी हिंदी में लिखती हैं, विज्ञान की छात्रा होने के कारण उनका साहित्य से कोई लेना देना नहीं रहा है पर उन्होंने हिंदी साहित्य में अपनी रूचि को जारी रखा . तनिमा के लेख मासिक पत्रिका “नींव” में प्रकाशित हो चुके हैं. उनकी किताब “पल्लव तरू के” जोकि एक कविताओं का संग्रह है प्रकाशित हो चुकी है एवं उन्होंने  हिंदुस्तान टाइम्स के लिये भी प्रयास किया वह सफल रहा । पिछले साल उनकी एक लघु कथा आर्मी की वार्षिक मैगज़ीन “अवनी” में प्रकाशित हुई  एवं इसी वर्ष जयपुर लिट्रेचर फ़ेस्टीवल जो एशिया का सबसे बड़ा लिटरेरी फ़ेस्टीवल है उसमें प्रतियोगिता में भाग ले चुकी हैं माही संदेश” में भी कुछ लेख प्रकाशित हो चुके हैं। तनिमा लेखन को अपनी क़लम के माध्यम से हमेशा के लिये जीवित रखना चाहती हैं।

तनिमा तिवारी आपकी कहानी “स्वयंवर” को जगरनॉट लेखन मंच पर  पाठकों द्वारा काफी पसंद किया गया हैं, इस कहानी के बारे में विस्तार से बताएं |

दरअसल पहली बार मैंने पौराणिक विषय पर लिखा है। मेरी जिज्ञासा हमेशा कुछ नया करने की प्रेरणा देती है। महाकाव्यों रामायण और महाभारत के द्वारा स्वयंवर के बारे हम बचपन से ही सुनते आएं हैं । सबसे पहले इस कहानी के माध्यम से बताना चाहती हूँ कि स्वयंवर के नाम पर किस तरह राजा अपनी बेटियों को पुरस्कार के रूप मे दे देते थे। लेकिन वैदिक काल मे कुछ कन्याओं द्वारा अपने आप वर चुनने के प्रमाण भी मिलते हैं।

पुराने समय में स्त्रियों को अपनी पवित्रता सिद्ध करने के लिये तरह-तरह की परीक्षा देनी पड़ती थी, लेकिन मैंने अभी तक नहीं पढ़ा कि पुरूषों ने भी इस तरह की परीक्षा दी है। इसलिये इस कहानी में स्त्री वर्ग की सहन करने की असीम शक्ति को बताने की कोशिश की है।इन सभी के चलते पुरुष वर्ग महिलाओं का सम्मान भी करते थे जैसे राम ने सीता और पाण्डवों ने द्रोपदी के लिये युद्ध किया। पौराणिक कथाएं हम सभी के लिये धरोहर और अनंत ज्ञान का भंडार है। इनसे बहुत कुछ सीखने को मिलता है।

क्या आपको लगता है कि पहले की अपेक्षा वर्तमान समय में लड़कियों को अपनी पसंद से शादी करने  और वर चुनने की अधिकार है ?

कुछ हद तक समय के साथ-साथ बदलाव आया है। लड़कियाँ अपने मनपसंद का वर चुन तो लेती है, लेकिन समाज के सामने उन्हें कई तरीके से नीचा दिखाने की कोशिश की जाती है जैसे जाति, परिवार, रहन-सहन के मुद्दे को लेकर। जब वे अपने पसंद से वर चुनती है तो कभी-कभी उनके चरित्र के ऊपर भी सवाल उठाये जाते है, जिससे उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुँचती है। धीरे-धीरे बदलाव आ रहा है बस हम सभी को अपनी सोच भी बदलनी होगी, जिससे अपने आप वर चुनने वाली लड़कियों को भी सम्मान के साथ देखा जाए।

आपकी कहानी और कविता पहले भी जगरनॉट के लेखन मंच पर प्रकाशित हुई हैं लेखन मंच से जुड़ने का अनुभव अनुभव कैसा रहा?

मैंने कहानियों और एक कविता को जगरनॉट के लेखन मंच पर साझा किया है एवं  उनकी प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लिया है। यह मंच मुझे बहुत पसंद है क्योंकि इनके द्वारा प्रतियोगिता में दिए गए शीर्षक रोचक होते हैं एवं इस माध्यम से मैंने अपने लेखन में निखार लाया है और भविष्य में जगरनॉट से जुड़े रहने की आशा करती हूँ। अपने लेखन को प्रकाशित करने के लिये जब भी जगरनॉट की संपादक टीम से कुछ पूछना पड़ा है, मुझे बड़ी ही सहजता के साथ जल्द से जल्द उसका हल मिला है। पूरी टीम बहुत सक्रिय एवं हमेशा नया करने की प्रेरणा देती है। इसके अलावा जगरनॉट पर पाठकों की संख्या काफ़ी ज़्यादा है जिससे नए उभरते हुए लेखकों को अपनी प्रतिभा के प्रदर्शन का मौक़ा मिलता है एवं वे सभी सराहे भी जाते है।

आप आगे किन नए विषयों पर कहानी लिख रही हैं?

मैंने अपने लेखन की यात्रा कविताओं से शुरू की है और “पल्लव तरू के” नाम से कविता संग्रह भी प्रकाशित हो चुका है। एक लघु कथाओं और एक कविताओं का संग्रह प्रकाशित होने के लिये बिलकुल तैयार है। मै 5-15 वर्ष के बच्चों के लिये मासिक पत्रिका “नींव” में भी कहानियाँ और कवितायें लिखती हूँ। एक उपन्यास “मझधार” भी लिख रही हूँ जिसका मुख्य विषय है कि महिलाओं को शादी के बाद किन- किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है। स्वयंवर को आपके द्वारा चुनने के बाद इस पर एक उपन्यास लिखना चाहती हूँ।

मेरा लेखन संस्कृति, पर्यावरण, भावनाओं  और प्रेरणा से जुड़ा हुआ है और मेरी देश भक्ति की भावना लेखन को संस्कृति और सभ्यता से जोड़ देती है। पर्यावरण पर लिखना एक लेखक के लिए ज़रूरी हो गया है क्योंकि हरा-भरा देश कहीं न कहीं प्रगति में सहायक होता है। भावनात्मक और प्रेरणादायक लेखन मेरे पसंदीदा क्षेत्र है क्योंकि भावनात्मक रचनाओं से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है, ये हमारे अंदर के उत्पन्न विचारों से मिलाती है। प्रेरणादायक रचनायों का अस्तित्व एक साथ बाँधने और सकारात्मक मूल्यों को बढ़ावा देने में सहायता करते है। मेरे द्वारा लिखी गई कृतियों में विचारों, रीति-रिवाजों और मेरी काल्पनिक संसार का अनुनाद होता है।

आपका कोई एक पसंदीदा लेखक/लेखिका जिसकी लेखनी से आप प्रभवित हुई और लेखन की ओर अग्रसर हुई ?

मलाला युसुफज़ई की आत्मकथा ने मेरे ऊपर बहुत गहरी छाप छोड़ी है क्योंकि किस बहादुरी और साहस से मलाला ने कठिनाइयों का सामना किया। उन्होंने सही कहा है कि “एक किताब एक क़लम एक बच्चा और एक शिक्षक दुनिया बदल सकते हैं”। गुलज़ार की लिखी हुई  कविताएं पसंद करती हूँ क्योंकि उनकी रचनाओं मे सरलता और सच्चाई होती है। वैसे मुझे आत्मकथा पढ़ना बहुत पसंद है मेरी कुछ पसंदीदा आत्मकथाएँ- स्टीव जॉब्स, बराक ओबामा, नेल्सन मंडेला, सत्य नडेला, अब्दुल कलाम आज़ाद आदि हैं।

एक लेखिका के तौर पर हिंदी में महिलाओं का क्या भविष्य देखती हैं?

हिंदी रस और अलंकारों से भरी हुई एक बहुत ही प्यारी भाषा है। वर्तमान समय में हिंदी को आगे बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे है जो धीरे-धीरे सार्थक भी हो रहे है। यही कारण कि आज हिंदी कहानी लिखने पर मैं इंटरव्यू दे रही हूँ। वैसे हर भाषा का अपना एक अलग महत्व होता है एवं जो हमारी क्षेत्रीय भाषा होती है उसमें अपने भावों  का वर्णन ज़्यादा अच्छे से कर सकते हैं ।हमारे देश में हिंदी बोलने एवं पढ़ने वालों की संख्या सबसे ज़्यादा है इससे हिंदी का भविष्य अच्छा प्रतीत होता है।महिलाओं का जहाँ तक सवाल है नई-नई हिंदी की लेखिकाएंअपने अद्भुत लेखन की वजह से पहचानी जाने लगी है। जिस कारण हिंदी भाषा को आगे बढ़ने में सहायता मिल रही है।

तनिमा तिवारी की लिखी ‘स्वयंवर’ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

 

 

 

 

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