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संपादक की पसंद में इस हफ्ते  हमने बात की ‘ एक रंग के खून के भी हज़ारो नाम हो गए ‘ के लेखक जगदीश जाट  से ,वह वर्तमान में एक आईटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत है और साथ ही एक हिंदी ब्लॉग  jagdishjat.online चलाते हैं.मूलतः राजस्थान के एक गांव के रहने वाले है लेकिन शहर एवं गांव, दोनों को अपने में समेटे हुए है । समकालीन परिस्थितियों पर कविताओं या लेखों के माध्यम से व्यंग्य करने की कोशिश करते है । 

अपनी किताब एक रंग के खून के भी हज़ारों नाम हो गए, के बारे में विस्तार से बताएं ? कविता के ज़रिए व्यंग्य करने के लिए इस किताब की रचना की गई है. वर्तमान में हो रही घटनाओं पर पैनी नज़र रखते हुए उनके बारे में कविता के माध्यम से लिखना शुरू किया. आसपास हो रही घटनाओं ने व्यथित कर दिया और अंतर्मन की व्यथा को कलम के ज़रिए पन्नों पर उकेर दिया. इस कविता में नेता, भ्रष्टाचार, भेद-भाव एवं जाति-व्यवस्था के साथ ही किसान एवं जवानों की समस्याओं के साथ ही रोज़मर्रा की परेशानियों को केंद्र में रखा गया. जातिगत भेदभाव के कारण देश के विकास में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि सभी पार्टियां एक-दूसरी जातियों के बीच भेदभाव फैला कर अपना उल्लू सीधा करने में लगी हुई हैं. इसके बाद किसानों एवं मजदूरों की समस्याओं को भी अपनी लेखनी के माध्यम से प्रकट करने की कोशिश की. मानवीय संवेदनशीलता एवं गुणों को जगाने के लिए एक कविता कन्या भ्रूण हत्या एवं धार्मिक अंधभक्ति पर लिखी है. इस तरीक़े से किताब लिखने का आईडिया कहां से आया? साहित्य हर युग एवं काल में चेतना का मुख्य स्रोत रहा है. व्यंग्य विधा में कविताए लिखने के लिए समसामयिक घटनाओं ने प्रेरित किया. क़लम के माध्यम से सामाजिक समस्याओं को हल करने की कामयाब कोशिश करने का जज़्बा हमेशा लिखने के लिए प्रेरित करता रहा. आसपास हो रही घटनाओं को देखकर दिल सन्न रह जाता है, ऐसे लगता है कि विकास के क्या मायने निकाले जाएं. यदि देश में करोड़ों लोगों को एक समय का ही भोजन मिले तो मंगल गृह पर पहुंचना बेमानी हो जाता है. इस तरह हर कालखंड में घटित घटनाओं के ऊपर अपने विचार लिखने के लिए कविता सबसे उचित माध्यम लगा. क्या कविता में राजनीति, धर्म और समाज में फैली बुराइयों पर कटाक्ष करना असरदार साबित होगा? पद्य के माध्यम से सरल भाषा में लिखी गई बात लोगों तक जल्दी पहुंचती है और पद्य में लिखी बातें  समाज को ज़्यादा कटोचती भी हैं. व्यंग्य शैली में लिखा गया पद्य ज़्यादा कारगर साबित होता है. कविताओं ने देश की आज़ादी से लेकर देश में हुए कई जन आंदोलनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. सरल भाषा में कही हुई बात हमेशा से लोगों को समझ में आती है. चंद पंक्तियां वो काम कर जाती हैं जो कभी-कभी सरकारें या समाज नहीं कर सकता. समाज में हो रहे दुष्प्रचार एवं अफवाहों के दौर में किसी न किसी को तो आगे आना ही होगा. सोशल मीडिया के प्रभाव ने धर्म एवं राजनीति के प्रभाव को असीमित कर दिया है तथा अंतिम छोर पर बैठा व्यक्ति भी अपने आप को सक्रिय भूमिका में रखना चाहता है. एक लेखक को निरंतर लिखते रहने के लिए क्या चीज़ अपनानी चाहिए? निरंतर लिखने के लिए आपको ज़्यादा किताबें पढ़नी चाहिए और इसी के साथ आपके आसपास हो रहे बदलावों को भी बारीकी से देखने की ज़रूरत है. प्रकृति, राजनीति, धर्म एवं समाज में रोज़ कई घटनाए होती हैं जो लिखने के लिए प्रेरित करती हैं. इन्हीं घटनाओं एवं सामाजिक परिप्रेक्ष्य पर तब तक कटाक्ष करना चाहिए जब तक बदलाव न आ जाए. किताबें पढ़ने से आप को मालूम पड़ेगा कि आपका ज्ञान कितना सीमित है, अतः साथी लेखकों की किताबें पढ़ें एवं कुछ भी लिखने के पहले डरे नहीं. क्या आप लिखने के लिए किसी ख़ास नियम को फॉलो करते हैं? जी नहीं, पद्य के साथ-साथ व्यंग्य लिखने का भी शौक़ है और समसामयिक घटनाओं पर लिखने में ज़्यादा आनंद आता है. भाषा में त्रुटि रहती है लेकिन शब्दों में भाव भरने की कोशिश करते हैं ताकि अगर कोई चंद पंक्तियां भी पढ़े या सुने तो एक बार ज़रूर दोहराए. पंक्तियां ऐसी लिखते हैं कि पाठकों के दिमाग़ में एक बार कड़ा प्रहार करती हों. नए लेखकों के लिए जगरनॉट का राइटिंग प्लेटफॉर्म किस तरह से अलग है? जगरनॉट का राइटिंग प्लेटफार्म मेरे जैसे नए लेखकों के लिए वरदान है क्योंकि बिना तकनीकी ज्ञान के बावजूद आप अपनी रचनाओं को एक किताब की शक्ल दे सकते हैं. इसके साथ ही यह आपको एक पाठक वर्ग भी उपलब्ध करवाता है जो आपको बहुत कम समय में फीडबैक दे सकता है जिससे अगली रचना लिखने में आसानी होती है. प्रकाशकों एवं लेखकों की अंतहीन जंग में जगरनॉट एक उम्मीद की किरण बन कर आया है. नवोदित लेखकों के लिए प्रकाशक मिलना लगभग मुश्किल है लेकिन इस प्लेटफॉर्म के ज़रिए वो अपनी रचनाएं एक समृद्ध पाठक वर्ग तक पहुंचा सकता है. जगरनॉट को इसके लिए बहुत-बहुत साधुवाद. आपके पसंदीदा लेखक/लेखिकाएं कौन है और क्यों ? प्रेमचंद मेरे सबसे पसंदीदा लेखक है क्योंकि उनकी रचनाओं में सरल शैली एवं भावनात्मक जुड़ाव बेजोड़ है । प्रेमचंद के साथ ही काका हाथरसी, हरिशंकर परसाई , शरद जोशी , श्रीलाल शुक्ल की रचनाएं भी बहुत ही प्रिय है । इसके साथ ही वो हर रचना जो दिमाग़ पर एक कड़ा प्रहार करने का ताक़त रखती हो भले ही वो किसी किताब से हो या सोशल मीडिया पर शेयर की हुई । नए लिखने वालों के लिए कोई सन्देश देना चाहेंगे ? जो भी लिखें अपने मन से लिखें, कॉपी-पेस्ट में न उलझें. लेखक होना बड़ी ज़िम्मेदारी का काम होता है क्योंकि आपको ज़बान न चलाकर अपनी क़लम चलानी होती है.  सामाजिक सरोकारों की गठरी कंधों पर उठाए, ज़बान को लगाम देकर, कलम के घोड़े दौड़ना एक चुनौतीपूर्ण कार्यक्रम है जिसे उचित क्रम का पालन करना होता है.

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