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शायरी प्रतियोगिता ‘भीगी भीगी रात में’ के विजेता मोनिस रहमान रहें हैं  उन्होंने अपनी स्नातक स्तर की पढ़ाई चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से पूरी की. उसके बाद उन्होंने  ITI इलेक्ट्रानिक्स का डिप्लोमा किया, मोनिस रहमान ने कई पत्रिकाओं, अख़बारों और पोर्टल्स में शायरी लिखी है.

अभी तक उनकी ग़ज़लें और लेख मेरा भारत महान, मुस्लिम टुडे , न्यूज़ स्टोरी आदि में छपते रहें हैं .उन्होंने कई  शहरों में आल इंडिया मुशायरें भी पढ़ें हैं.शायरी को लेकर वो हमेशा से सक्रिय हैं और आगे भी अपनी आने वाली ज़िन्दगी को शायरी के लिए समर्पित करना चाहते हैं.

मोनिस रहमान आपकी शायरी विजेता रचना रही है ‘भीगी भीगी रात’ में प्रतियोगिता की, अपनी इस शायरी के बारे में थोड़ा विस्तार से बताएं.

रात की रानी असल में एक मिश्रण है उन ग़ज़लों और नज़्मों का जो भीनी भीनी खुशबु से हमारे आसपास के  माहौल  को महका दे. मैं चाहता हूँ कि आज की व्यस्त ज़िन्दगी में  जब हमें अपने लिए भी वक़्त नहीं है तो हमें अपने आपको रिलैक्स करने के लिए इस तरह की शायरी से लुत्फंदोज़ होना चाहिए.

आपने ग़ज़ल/कविता लिखना कब आरंभ किया?

जब मैं 13 साल की उम्र में था तब मैंने लिखना शुरू किया, मुझे उस वक़्त ये नहीं पता था की कि वह ग़ज़ल हैं, कविता है, नज़्म है या तुकबंदी, फ़िर जैसे-जैसे उम्र बढ़ती गई तो सलाहियत भी बढ़ने लगी .जब मैं 17 साल की उम्र में पहुंचा तब मैंने पहला शेर कहा था तो शायरी के मापदंड पर खरा उतरता था.

आप आज के दौर में एक शायर का क्या भविष्य देखते हैं?

देखिये शायर का भविष्य हर दौर में उज्वल रहा है, हाँ वक़्त के साथ-साथ शायरी ने अपने आपको बदला है, जिस से उस दौर के शायर को नुकसान हुआ है. लेकिन आजकल ऐसा नहीं है शायरी का चलन हमारी फिल्म इंडस्ट्री में बहुत बढ़ गया है, जिसकी वजह से मुझे लगता है शायर का भविष्य आने वाले वक़्त में उज्वल ही है.

आखिर क्या वजह है कि उर्दू और हिंदी शायरी में रचनाकारों में एक दूरी है? इसपर आपकी राय?

देखिये उर्दू जो है वो उर्दू है और हिंदी जो है वो हिंदी है, ऐसा नहीं है की हिंदी और उर्दू के बीच में बहुत ज्यादा दुरी है, हाँ लेकिन हम बहुत नज़दीक भी नहीं हैं. मिसाल के तौर पर उर्दू का शायर अपनी पूरी बात को दो लाइन के शेर के अन्दर पिरो कर पेश कर देता है वही एक हिंदी का कवि अपनी बात कहने के लिए कम से कम एक पेज की कविता लिखेगा, अगर हम हिंदी के शब्दों को सही तरीक़े से, सही वक़्त में और सही जगह पिरोना सीख गये तो उम्मीद करता हूँ यह दुरी भी बड़ी जल्दी ख़त्म हो जाएगी.

आपको जगरनॉट लेखन मंच का कितना लाभ हुआ?

जगरनॉट वाक़ई एक बे-मिसाल प्लेटफॉर्म प्रदान करता है, हम जैसे नए लिखने वालों को, एक बेहतरीन मंच है अपनी बात रखने के लिए, लोगों तक पहुँचने के लिए और मुझे भी इससे से बहुत लाभ हुआ है जो लोग मुझे नहीं सुन पाते थे या मेरा लिखा नहीं पढ़ पते थे उन लोगों ने मुझे जगरनॉट के मुहय्या कराये हुए प्लेटफार्म पर ही पढ़ा है.

आपकी आने वाली रचनाएं कौन कौन सी हैं?

मेरी आने वाली ग़ज़लें और गीत कई सारे हैं , लेकिन फिलहाल मैं (बचपन , बदचलन और शराब ) इन तीन रचनाओं पर काम कर रहा हूँ.मेरा हमेशा से रुझान रहा है कि मैं फिल्म इंडस्ट्री के लिए कुछ करूँ. मेरे दो गीत कंपोज़ हो रहें है और बहुत जल्द आप उनका लुत्फ़ उठा पाएंगे .

उर्दू हिंदी में आपके पंसदीदा लेखक/लेखिकाएं कौन हैं?

मेरे पसंदीदा लेखक और लेखिकाएं बहुत सारी हैं , हर दौर के लेखकों को मैं पसंद करता हूँ, मैं मंटो को भी पसंद करता हूँ और इस्मत को भी पसंद करता हूँ , मैं ग़ालिब , दाग, मीर को पसंद करता हूँ तो इकबाल, परवीन शाकिर और अहमद मुश्ताक को भी पसंद करता हूँ. कहने का मतलब यह है जो भी बेहतरीन लिखने वाला है वो मेरा पसंदीदा लेखक या लेखिका है.

मोनिस रहमान की लिखी ‘रात की रानी’ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

 

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