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सोशल मीडिया ने लघु प्रेम कथा के द्वारा हमें कई बेहतरीन लघु कहानियां पढ़ने का अवसर प्रदान किया है, जगरनॉट का लेखन-मंच न भी  ऐसी ही एक पहल के द्वारा लेखक, मीडिया आलोचक विनीत कुमार के साथ इस कार्यशाला का आयोजन किया.

हिंदी ब्लॉगिंग की दुनिया में लम्बे अरसे से सक्रिय विनीत ने सोशल मीडिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई. मीडिया विश्लेषक विनीत कुमार, प्रसिद्द पुस्तक, ‘‘मंडी में मीडिया, इश्क़ कोई न्यूज़ नहीं ‘ के लेखक हैं और लगातार देश विदेश में मीडिया की भूमिका पर चर्चा करते रहते हैं।  थोड़े समय के लिए मीडिया संस्थानों से जुड़े और फिर किताबों की दुनिया में लौट आएं विनीत ने इस वर्कशॉप में सभी प्रतिभागियों से न्यूज़ चैनलों की अन्दरूनी दुनिया से लेकर, कॉलेज की क्लासरूम तक की अपनी  लप्रेक की कहानियां साझा की.

विनीत का कहना था कि कोई भी व्यक्ति जो अपने आस पास घटित होने वाली घटनाओं को एक अलग नज़र से देखता है उसके लिए हर एक चीज़ में कई कहानियां हैं, उन्होंने ये भी कहा कि आम लोगों की नज़र में शहर की एक नकारात्मक इमेज बनती जा रही है,जबकि इस शहर में इश्क है, दोस्ती है, रिश्ते हैं, मिलने बिछड़ने की अनगिनत कहानियां है. जिस तरह से हर व्यक्ति का लिखने का तरीका अलग होता है उसी तरह से किसी शहर, गाँव का रहन सहन भी अलग होता है, और उसी से बनती है प्रेम कहानियां.

उन्होंने ये भी बताया कि सोशल मीडिया पर मौजूद उनके सभी दोस्तों, फॉलोअर्स  से एक रिश्ता बनता जाता है जिसको कहानियां हमेशा जोड़े रखती हैं. उनकी सभी प्रेम कहानियां वो हैं जो फसबुक पर अपलोड हो चुकी हैं.

वर्कशॉप में एक छोटी सी लेखनशैली का भी अभ्यास भी किया गया जिसमें सभी ने अपनी अपनी लेखनी से विनीत को प्रभावित किया, विनीत ने सभी से आगे भी इसी तरह लिखने का अनुरोध किया और अपनी किताब इश्क कोई न्यूज से अपनी कई कहानियां भी पढ़ कर सुनाई.

 

इस कार्यशाला का आयोजन सी एम वाय के बुक स्टोर, ग्रेटर कैलाश में किया गया.

 

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