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रावण ने लंका की गद्दी को नोबेल पुरस्कार के चक्कर में त्यागकर लंका को लोकतंत्र घोषित कर दिया। परंतु जल्द ही उसे इस बात का अहसास हो गया कि सरकारी भत्ते से उसके खर्च का वहन नहीं हो सकता। फिर क्या था, अगले चुनाव में रावण खुद चुनाव लड़ा और लंका का प्रधानमंत्री बन गया।

रावण ने प्रधानमंत्री रहते हुए, निम्नलिखित 7 नियमों का उपयोग करके जनता को लोकतंत्र का मजा चखाया।

1 – घोटाला करना लोकतंत्र के नेताओं का मानवाधिकार है इसलिए रावण ने नियम बनाया कि नेताओं पर घोटाले के अपराध में मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है। घोटालेबाज नेताओं पर मुकदमा चलाना उनके मानवाधिकार का हनन होगा।

2 – बढ़ती गरीबी को कम करने के लिए रावण ने गरीबी रेखा को इतना नीचे कर दिया कि भूख से मरनेवाले लोग भी इन्कम टैक्स के दायरे में आ गए।

3 – सरकार को जनता चुनती है इसलिए सरकार पर लगनेवाले हर दोष का अपराधी रावण ने जनता को ठहराया और सप्ताह में एक दिन जनता को दस – दस कोड़े खाने का नियम बना दिया।

4 – किसानों के मुद्दे पर रावण को विपक्ष रोज घेर रहा था तो रावण ने अपने शार्प शूटरों से कहकर किसानों को ठिकाने लगाने का प्रबंध कर दिया।

5 – रावण ने गाड़ी चलाने का अधिकार सभी लोगों से छीनकर सिर्फ कुछ पैसेवालों को दे दिया, उसने बताया कि गरीबों को गाड़ी चलाने का कोई हक़ नहीं है। गरीब सिर्फ गाड़ी से कुचले जा सकते हैं।

6 – रावण ने पिछली सरकार की योजनाओं का नाम बदलकर पुनः जनता के सामने लॉन्च किया और सोशल मीडिया की मदद से जनता को झूठा सपना दिखाने का कार्य आरंभ कर दिया।

7 – रावण ने राजनीति को कर्मप्रधान से बदलकर भाषणप्रधान कर दिया।

 

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