By

अंकुर बीमार हो गया है, इसलिए तुम उसके बदले जा सकती हो. लेकिन इसे पक्का करो कि तुमको एक टॉप स्टोरी मिले.’ मेरे बॉस मोहित ने हमारी सुबह की खबरों की बैठक में कहा. अंत में, मेरा बड़ा ब्रेक आ गया था. भारतन्यूज़24 में एक खेल पत्रकार के रूप में तीन साल काम करने के बाद, मुझे मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में इंडियन प्रीमियर लीग फाइनल को कवर करने के लिए भेजा जा रहा था. ‘लेकिन तुमको निकिल को अपने साथ लेना होगा. वह मुख्य साक्षात्कार करेगा. तुम एक खिलाड़ी से गपशप करके उसकी मदद कर सकती हो,’ मोहित ने मीटिंग रूम की मेज़ से अखबार इकट्ठा करते हुए कहा.

मेरा उत्साह बुझ गया. मोहित ने मुझ पर अपना काम ठीक से करने के लिए क्यों भरोसा नहीं किया? मैं इतनी दृढ़ निश्चय हूं, मैं एक टीवी खेल रिपोर्टर के पद तक पहुंची हूं, जो इक्कीसवीं शताब्दी में भी एक महिला के लिए दुर्लभ बात है. ‘जॉब्स फॉर द बॉयज़’ एक ऐसा आदर्श वाक्य था जो हमारे उद्योग में कायम था और मैंने बड़ी मेहनत की थी कि मैं टीवी में बस दिखावटी पत्रकार बन कर न रह जाऊं. मैंने अपनी ड्रेस पर निगाह डाली और यह हमेशा की तरह सादगी भरी थी – काली पतली जींस, एक पीला, लंबे बाजू वाला रेशमी टॉप और फ्लैट जूते. अपनी नाराज़गी को खुद तक रखते हुए मैंने अपना बैग उठाया, कैमरामैन को मुझे शाम 6 बजे स्टेडियम में मिलने के लिए कहा और मैच से पहले थोड़ा खाने के लिए बाहर निकल गई. वानखेड़े स्टेडियम गहरे नीले आसमान में अपने सैकड़ों चमकदार लाइटों के साथ जगमग कर रहा था. बीतती हुई मई की शाम की गर्मी बनी हुई थी, जिससे मेरे हाथ-पांव सुस्त महसूस हो रहे थे और मेरी गति धीमी हो गई थी.

मैंने सेक्योरिटी गार्ड को अपना प्रेस पास दिखाया और उसने मुझे मीडिया एंट्रेन्स से अंदर जाने दिया.

खेल शुरू हो चुका था और भीड़ की प्रतिक्रिया से देखते हुए लग रहा था कि घरेलू जीत रही थी. मैंने प्रेस रूम में अपनी जगह ली और स्कोरबोर्ड पर नज़रें गड़ा दीं.

मुंबई लायंस ने 20 ओवर में 6 विकेटों  पर 179 रन बनाए थे. भीड़ पागल हो गई थी और उसने जपना शुरू कर दिया था: गणपति बप्पा मोरया गणपति बप्पा मोरया गणपति बप्पा मोरया अब दिल्ली टाइगर्स की बल्लेबाजी करने की बारी थी. नीले और लाल रंग की यूनिफॉर्म में दो पुरुष पिच पर थे और वातावरण में रोमांच और तनाव साफ था.

उनके चारों ओर नीले रंग में कपड़े पहने पुरुषों का झुंड था. वे युद्ध के लिए तैयार थे. पगड़ी वाले एक गेंदबाज़ ने पोज़ीशन ली, दौड़ा और गेंद को नीले रंग पहने बल्लेबाज़ की तरफ फेंक दिया. भीड़ सांसें थामे हुए शांत हो गई. सन्नाटा.

स्कोरबोर्ड दिखा रहा था, दिल्ली टाइगर्स के 10 ओवर में 7 विकेट पर 65 रन बने थे. प्रशंसक फिर से पागल हो गए थे.निकिल अब प्रेस एन्क्लोज़र की ओर मुड़ गया, सभी एक स्टार खिलाड़ी से एक्सक्लुसिव के लिए तैयार और उत्साहित थे. इस बीच, मुझे पैरवी का काम करना था.अभी भी मैं एक महत्वपूर्ण स्टोरी को कवर नहीं कर पाने की अपनी निराशा से उबरी नहीं थी. मैंने सोचा कि शायद मुझे प्रेस के जत्थे के बाहर कुछ दिलचस्प मिल जाए.मैं वानखेड़े को अच्छी तरह जानती थी, क्योंकि मेरे चाचा मुझे छह साल की उम्र से यहां मैच के लिए ले आ रहे थे. क्रिकेट मेरा जुनून और मेरा जीवन था, यह मेरे लिए सारी बातों में सबसे पहले आता था. ब्वॉयफ्रेंड्स से भी पहले.

मेरे कुछ प्रेमी रहे हैं, लेकिन कोई लंबा प्रेम कभी नहीं चला. मेरे सपनों का राजकुमार अभी भी विंग्स में कहीं इंतज़ार कर रहा था.

मैं ड्रेसिंग रूम की सीढ़ियों की तरफ बढ़ चली, जो एक गलियारे की बगल में थी जो पूरे स्टेडियम को घेरे हुए थी. वहां कोई भी नहीं था, इसलिए मैं शांति से अपनी कहानी की तलाश कर सकती थी. गलियारा मुझे ग्राउंड के अंदरूनी हिस्सों में ले गया. यह एक भूलभुलैया थी, अंतहीन दरवाज़ों और एन्क्लेव्स की भूलभुलैया. मैंने एक दायां मोड़ लिया और दाहिनी ओर दरवाज़ों की एक श्रृंखला देखी. पहले पर मुंबई लायंस का परिचित लॉयनहेड प्रतीक लटक रहा था. दरवाज़ा थोड़ा सा खुला था इसलिए मैंने इसे थोड़ा धकेल कर और खोल दिया. मैं धातु के जर्जर पुराने लॉकरों वाले एक ड्रेसिंग रूम में प्रवेश किया, जिसमें बाईं तरफ एक शावर रूम था. क्रिकेट बैग्स का एक विशालकाय ढेर फर्श पर लगा था, जिसमें अतिरिक्त बल्ले और हेलमेट भी पड़े थे.

मैं चारों ओर देख रही थी कि खबरों के लायक कुछ मिल जाए, जिससे कुछ सुराग मिले कि खिलाड़ियों के दिमाग में क्या चल रहा है.

लॉकर रूम गर्म था और उसमें केवल एक सीलिंग फैन लगा था. आप तो यही सोचेंगे कि भारत के सबसे अच्छे स्टेडियम में वातानुकूलित चेंजिंग रूम होता होगा.

अचानक मैंने पानी चलाने की आवाज़ सुनी और मुझे पता चला कि मैं अकेली नहीं थी. मैं दम साधे हुए आगे बढ़ी.शावर रूम का पतला सा दरवाजा हल्का सा खुला था, जिससे मुझे एक आदमी की मजबूत, मांसल पीठ एक झलक मिली. मुझे अपराधबोध महसूस हुआ, लेकिन मैं इस छह फुट-दो इंच के ढांचे और छोटे, भूरे बालों को देखने से खुद को रोक नहीं सकी.मैं करीब आ गई और उसके नितंबों का बेहतर नज़ारा देख पाने में कामयाब रही, जो दो छोटे फ़ुटबॉल जैसे, मांसल और कठोर थे. मैं अपनी जांघों के बीच एक गर्म झुरझुरी सी महसूस करने लगी थी, मैं देख रही थी कि वो अपनी देह पर, अपनी पूरी पीठ पर, गर्दन और मांसल टांगों पर साबुन मल रहा था.

सेक्सी कल्पनाओं की बाढ़ मेरे मन में आई और मैंने सोचना शुरू किया कि उस शानदार शरीर के सामने वाले हिस्से के साथ मैं अपने हाथों और मुंह से क्या क्या कर सकती थी और बदले में वो मेरे साथ क्या कर सकता था? सहज रूप से मेरे हाथों ने मेरी जींस के अंदर अपना रास्ता खोज लिया. अभी भी उसकी पीठ मेरी ओर थी, लेकिन मैंने देखा कि वह अब अपने नीचे के निचले इलाकों पर विशेष ध्यान दे रहा था, अपने निजी अंगों पर साबुन लगा रहा था. मुझे लगा कि मेरी नाक खुजलाने लगी थी. नामुराद साबुन से मेरी एलर्जी! मैं खुद को रोक नहीं पाई और मैं जोर छींक पड़ी. शॉवर के नीचे खड़ा आदमी घूम गया.

‘आखिर इसका…’ मेरा दिल धड़क उठा. बेशक मैंने उसे पहचान लिया था! यह मुंबई लायंस के सबसे प्रमुख खिलाड़ियों में से एक रोहित शिवदासानी था. जरूर वह आउट हो गया होगा और संभवतः कमरे में भीड़ होने के पहले शावर कर लेना चाहता था. बस मैं सिर्फ कसम खाना चाहती थी.

वह वहीं जड़ हो गया था, एकदम स्थिर. उसके चेहरे का रंग उतर चुका था. उस पल जाकर मुझे पता चला कि अपनी जींस के भीततर अपने हाथ डाले मैं कितनी हास्यास्पद दिख रही होऊंगी. देखने के लिहाज से वह पूरी तरह भव्य था. पानी उसके चेहरे और बालों से टपक रहा था, और उसके पास एक कसा हुआ चेहरा, कसे हुए गाल और लंबी भवों से घिरी गहरी भूरी आंखें थीं. हालांकि वह मुस्कुरा नहीं रहा था. ‘तुम कौन हो? और यहां क्या कर रही हो?’

अचानक, उसने दरवाजे पर हुक से एक तौलिया उठाया और अपने चारों ओर लपेट लिया. लेकिन वह जो कुछ छिपाने की कोशिश कर रहा था, उसे मैंने देख लिया था. यह प्रभावशाली और थोड़ा डरावना भी था! ‘आई एम सो सॉरी, मैं आपको हैरान नहीं करना चाहती थी. बात सिर्फ इतनी है कि दरवाज़ा खुला था और…’ प्रति मिनट हजारों की दर से शब्द मेरे मुंह से निकलने लगे. मैं डर गई थी क्योंकि मैंने कल्पना की कि साबुन के झाग के साथ साथ मेरी प्यारी नौकरी भी नाली में बह रही थी. ‘मैं सिर्फ एक पत्रकार हूं मैं यहां आई था…उम्म…एक कहानी की तलाश…’ अब वो गौर से मेरी तरफ देख रहा था. मानो वह अतीत की एक छवि को याद करने की कोशिश कर रहा हो. उसने कहा, ‘तुम याद हो मुझे. तुम यहां पिछले आईपीएल में थी, लेकिन मैंने तुमको किसी भी पोस्ट-मैच पार्टी में नहीं देखा.’ ‘उम्म, हां, हमारे पास केवल सीमित संख्या में टिकट होते हैं और आमतौर पर उनमें लड़कों को जाना होता है,’ मैंने कहा, मेरी आवाज़ लड़खड़ा गई.

मैं विश्वास नहीं कर सकती थी कि रोहित शिवदासानी जैसी हस्ती मुझे अपने सभी प्रशंसकों के बीच से मुझे याद रखे हुए थी.

वो कुटिलता से मुस्कुराया, ‘तुम्हारी जैसी एक अविस्मरणीय लड़की हर किसी की गेस्ट लिस्ट में होनी चाहिए.’ ‘वेल, मैं खुश हूं कि कोई ऐसा सोचता है.’ ‘तो हमें इसके बारे में क्या करना चाहिए? हम कैसे श्योर करे कि आपकी जैसी क्यूटी सभी सही पार्टियों में जा सके?’ उसकी आंखें मेरे शरीर को भूखी निगाह से देख रही थीं.

क्या? यह सही नहीं हो सकता! वो न सिर्फ मुझ चिल्लाया नहीं था, बल्कि उसने मुझे क्यूटी बुलाया था! ‘उम्म…आप मुझे एक साक्षात्कार दे सकते हैं?’ मैंने यों ही अपनी भौंहों को सिकोड़ा. मैं सोच रही थी कि मुझे अपनी किस्मत को थोड़ा और आजमाना होगा.

‘और तुम बदले में मुझे क्या दोगी?’ ‘आप शावर से अभी अभी तरोताजा होकर निकले एक नंगे मर्द को क्या दे सकते हैं? हम्म…यह कठिन है,’ मैंने कहा और सोचने का दिखावा करने लगी, ‘मुझे कहना ही होगा कि मैं कभी भी इतने मुश्किल सवाल से रू ब रू नहीं हुई थी.’ ‘एक बात है,’ उसने धीरे धीरे, मुस्कुराते हुए और मेरी ओर एक कदम उठाते हुए कहा. ‘ओह बताइए, मैं जानना चाहती हूं.’ ‘तुम मुझे एक चुंबन दे सकती हो,’ उसने एक भौंह सिकोड़ी. ‘बस एक छोटा सा.’ वाह! ‘रोहित शिवदासानी मेरे सामने करीब करीब नंगा खड़ा है और मेरे साथ फ्लर्ट कर रहा है.’ यह एक अविश्वसनीय फेसबुक स्टेटस था. ‘ठीक है, बिल्कुल, मैं पूरी तरह से अपने करियर के लिए समर्पित हूं, मैं एक स्कूप के लिए कुछ भी कर सकती हूं.’ मैंने बड़ी खुशी से अंदर ही अंदर अंगड़ाई ली, जब मैंने उसकी शरारती मुस्कान को देखा. उसकी लाजवाब रूप से फिट देह पर मेरी ललचाई निगाहें फिर रही थीं, जिस पर अभी भी पानी से फिसल रहा था. वास्तव में, ठीक उस पल, मैं सिर्फ यही सोच रही थी कि उन मुलायम, प्यारे होंठों को चूमना कैसा होगा. हम दोनों एक दूसरे के करीब थे –अगर कोई चुंबकीय पुल होता है तो वो वहां था! ‘फिर शुरुआत के लिए यह कैसा रहेगा?’ उसने अपने सिर को झुकाया और मेरे होंठों तक अपने होंठ लाए. मैंने भी उसकी ओर कदम बढ़ाए, अपना सिर पीछे किया और उसके होंठों तक पहुंचने के लिए पंजों के बल खड़ी हो गई. उससे साबुन और मिंटी टूथपेस्ट का स्वाद आ रहा था. उसकी जीभ मेरे मुंह के कोनों-अंतरों की जांच कर रही थी और उसके हाथ मेरी देह पर फिरते हुए मेरे कपड़े के ऊपर से मुझे महसूस कर रहे थे. वह बहुत बड़ा था और मैं छोटी थी, इस तथ्य के बावजूद हमारे शरीर अच्छी तरह से फिट आ रहे थे.

उसकी कमर पर लिपटा तौलिया गिर गया था और मैं देख सकती थी कि वह साफ तौर पर उत्तेजित हो चुका था.

‘क्या तुम अपना टॉप उतार सकती हो? यह सही नहीं है कि मैं अधनंगा हूं और तुम पूरे कपड़ों में हो,’ उसने कहा. मेरी गर्दन पर उसके होंठ अब मेरे शरीर में उत्तेजना की लहर दौड़ा रहे हैं. जैसा उसके कहा था, मैंने किया. मैंने अपने सितारों को शुक्रिया कहा कि आज सुबह मैंने अपनी पसंदीदा अंडरवियर पहने थे – एक लेस की गहरी नीली ब्रा और इससे मैचिंग पैंटी जिसके दोनों तरफ नन्हे बो बने थे.

रोहित के हाथ मजबूत और मांसल थे. उसने मुझे आसानी से उठाया और दीवार की बगल में एक नीची बेंच पर खड़ा कर दिया, जिससे हम ऊंचाई में बराबर हो गए. उसने एक तेज झटके से मेरी ब्रा को हटा दिया और मेरी छाती के ऊपर अपने होंठ चलाने लगा. अब दिख रहा था कि वह पूरी तरह उत्तेजित हो चुका है और उसके हाथ मेरे सारे शरीर की खोज-बीन कर रहे थे. मैं उसकी चिकनी, चौड़ी पीठ को थपथपा रही थी और अपने सिर पीछे की ओर झटक रही थी, क्योंकि उसके होंठ रास्ता खोजते-खोजते मेरे निपल्स तक पहुंच गए थे और उन्हें चाटने और चूसने लगे थे. मैंने उसके कंधों को कस कर पकड़ लिया और अपनी उंगलियों के नीचे उसकी गरम त्वचा को महसूस किया. ‘अब अपनी जींस से भी छुटकारा पा लो,’ उसने एक धीमी, खुरदरी आवाज़ में कहा और मेरी काली स्किनीज़ को नीचे खींचने लगा. हमारे ऊपर चला पंखा हमारे शरीर की गर्मी को शांत नहीं कर पा रहा था. उसने मेरी नीली रेशमी पैंटीज़ को देखा और मैंने अपना शुक्रिया अदा किया कि मैं हमेशा ही नीचे के अपने बालों को हटाती रहती हूं, मैं एक रस्म की तरह वैक्सिंग और ट्रिमिंग करती हूं.

उसने दाहिनी ओर के बो को खोल दिया और मेरी पैंटी को नीचे गिरा दिया, जिसके नीचे बालों की एक पतली सी पट्टी दिखने लगी, जिसे वो किसी भूखे की तरह चूमने लगा.

मैं महसूस कर सकती थी उसकी उंगलियां मुझे चीर रही हैं और मैं पीछे की ओर कठोर, खुरदरी दीवार पर टिक कर गई. अब मुझे सिर्फ उसकी लालसा थी. जुनून की लहर के बाद लहर मेरे शरीर में दौड़ रही थी और मुझे पता था कि मैं अपने चरमोत्कर्ष को अब और नहीं रोक सकती थी. मैंने उसके अभी भी गीले बालों को पकड़ा और उसके मुंह में अपने धड़कते सेक्स को घुसा दिया और मेरा संभोग सुख की गहनतम गहराई पर पहुंच गया. उसने मुस्कराकर ऊपर देखा. ‘बढ़िया, कैसा रहा मिस रिपोर्टर? क्या इससे कोई सुर्खी बनेगी?’ उसने एक खुली हुई मुस्कुराहट के साथ कहा. मेरी टांगें अभी भी कांप रही थी, जब उसने मुझे बेंच से नीचे उतरने में मदद की. जब मैं अपने संतुलन को वापस पाने के लिए बैठी, मैंने देखा कि उसका सेक्स अभी भी लालसा में तना हुआ और तैयार था. मैं उसे करीब से दुलारने के लिए उसे अपने हाथ में ले लिया, उसमें जीवन और लालसा धड़क रही थी.

मैंने जब रोहित की मर्दानगी को जड़ से लेकर नोंक तक चाटना शुरू किया तो उसने एक गहरी सांस ली. इसके बाद मैंने उसे अपने मुंह में ले लिया, और उसे इस तरह चूसने लगी मानों मैं भूखी थी, मैं उसे और अंदर, और अंदर ले रही थी. वो मेरे गले तक पहुंच गया था और आनंद से कराह रहा था.

उसके हाथ मेरे बालों में फिर रहे थे और मेरे सिर को और अपनी देह की तरफ खींच रहे थे. मैंने उसके कसे हुए नितंबों को पकड़ लिया और उसे अपनी तरफ जोर से खींचा. उसने एक गहरी हंसी छोड़ी. लेकिन इससे पहले कि मैं उसे चरमोत्कर्ष तक पहुंचा पाती, उसने मेरे कंधों को पकड़ा और मुझे मेरे पैरों पर खड़ा कर दिया.

‘लो, इस कुर्सी को पकड़ो,’ बेंच की बगल में पुरानी प्लास्टिक की कुर्सी की ओर इशारा करते हुए उसने कहा. मैंने सीट पर अपने हाथ रखे. मेरी पीठ रोहित की ओर थी, लेकिन मैं अपने पैरों के बीच उसकी कठोरता को महसूस कर सकती थी क्योंकि वो पीछे से धीरे-धीरे, इंच दर इंच मुझमें प्रवेश करने लगा था. मैंने अपनी पीठ को तान कर अपने एक नितंब को उठाया ताकि वह मेरे अंदर पूरी तरह से घुस सके. यह एक मीठी और दर्दनाक सनसनी थी. ‘अगर तुम चाहो तो मैं तुमको अधिक खुशी दे सकता हूं, एक सचमुच का एक्सक्लुसिव,’ वो फुसफुसाया. अब मैं बस हां ही कर सकती थी, क्योंकि अपने भीतर मौजूद उसकी कठोरता से मैं कांप रही थी. उसने मेरे अंदर खुद को और गहराई तक धंसाया. सेक्स की आवाज़ लॉकर रूम में भर गई और गर्मी ने हमारे शरीरों को फिसलन भरा बना दिया था. अचानक मुझे अपने नितंबों के बीच उसका हाथ महसूस हुआ, क्योंकि वह मेरे दूसरे वाले प्लेजर प्वाइंट को खोज रहा था. उसने अपनी उंगली से इसे उकसाया और कसावट के बीच में खुद को धकेलता रहा.

मेरे हाथ मेरे पैरों के बीच में चले गए. मेरी उंगलियां मेरी फूली हुई घुंडी को रगड़ रही थीं और मैंने अपनी बढ़ती हुई वासना को महसूस किया. सनसनी के चरम पर पहुंचने के बाद मैं उसके चारों तरफ कस चुकी थी. रोहित ने अपनी गति बढ़ा दी, अब वह लगभग असहनीय रूप से विशाल महसूस हो रहा था और उनका सेक्स कठोर और कठोर, तेज़ और तेज़ हरकत करता जा रहा था. वह आनंद में आहें भर रहा था और मेरी टांगे अब कांप रही थी. मैं सीधे खड़े रहने में असमर्थ थी, मैं अपने दूसरे क्लाइमेक्स के इतने करीब थी.

पूरी किताब पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें 

 

Leave a Reply