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यूं तो इस कहानी में वैसे तो बहुत सारे किरदार हैं, पर मीरा की नजरों से देखें तो सिर्फ तीन आरव, रोमा और मीरा।

ये कहानी असल में शुरू तो हुई एक ब्रेकअप से, मीरा और रोमा का ब्रेकअप। अपेक्षित जरूर था पर कुछ रिश्तों को हम कभी बांध कर नहीं रख सकते। मीरा इस ब्रेकअप से बहुत ज्यादा प्रभावित थी।

जैसे-जैसे दिन बीते मीरा रोमा को भूलने लगी पर उसी दौरान उस पर अपनी मॉम और डैड का दबाव बढ़ने लगा क्योंकि वो नहीं चाहते थे, कि उनकी बेटी सोसाइटी में उठने बैठने के लायक न रहे।

मीरा के डैडी – देखो बेटा हम तुम्हारे अच्छे के लिए सोच रहें हैं। तुम्हारे लिए एक लड़के का रिश्ता आया है। तुम अगर हाँ कह दो तो मिलने के लिए मुलाक़ात फिक्स कर सकते हैं।

मीरा- डैड आपको क्या हुआ है ?आप और मम्मा दोनों जानते हैं कि मुझे लड़कियों के बारे में क्या सोचती हूँ ।तो मैं ये कैसे कर सकती हूँ?

मीरा के डैडी – कैसे ,मतलब एक लड़की और दूसरी लड़की च.. अच्छा तुम मिल तो लो, मिलने से शादी हो जाती है क्या?उससे क्या मिलने से क्या हर्ज है।

मीरा- और मुझे ये समझाइये कि मिल के मैं करूँ क्या?

मीरा के डैडी – देखो अपने लिए न सही हमारे लिए मिल लो प्लीज़।

मीरा के मन में सिर्फ एक ही बात चल रही थी कि अगर उसके पेरेंट्स को इस सो- कॉल्ड फैमिली की मुलाकातों से ख़ुशी मिलती है, तो यही सही।मीरा के अंदर कहीं न कहीं एक डर हमेशा रहा कि वो किसी भी लड़के से बात करे तो कैसे।क्योंकि आज तक रोमा के सिवाय किसी से बात हीं नहीं की थी उसने पहली बार उसे एहसास हुआ कि वो रोमा पर कितनी आश्रित थी, और इस फीलिंग ने ही उसे मज़बूत बना दिया उस अजनबी लड़के से मिलने के लिए।दूसरे हीं दिन मीरा के माँ की फ्रेंड की फैमिली घर आई।

मीरा- अम्म ये मेरा रूम

आरव – स्वीट।जानकर अच्छा लगा कि हर लड़की की तरह तुम्हारा भी वॉल पिंक कलर का नहीं हैं।

मीरा- ओके ,वैसे क्या तुम हर लड़की को ऐसे ही जज करते हो?

आरव -अरे नहीं-नहीं नहीं ऐसा नहीं है आई एम सॉरी कि अगर मैंने तुम्हें बुरा मह्सूस करवाया हो तो, सच में सॉरी

मीरा-  ठीक है , असल में, आई एम सॉरी क्योंकि कभी-कभी न मैं कुछ ज्यादा ही खुलकर बात कर लेती हूँ। क्या करूँ लड़कों से कैसे बात करते हैं कोई आईडिया ही नहीं है।

आरव – ओह आई सी , कभी कोई बॉयफ्रेंड नहीं रहा तुम्हारा ?

मीरा- नहीं

आरव -ओह,कोई बात नहीं अब मैं तुम्हारे लाइफ में आ गया हूँ ,जान जाओगी।मेरा मतलब है हम दोस्त तो बन ही गए हैं राइट।

मीरा – (हँसते हुए)हाँ सही । तुम वैसे बात बहुत अच्छी कर लेते हो।

आरव – तुम कह रही हो तो अच्छी ही होंगी लेकिन, तुम्हारी मुस्कान से ज्यादा नहीं हैं।

मीरा -ओह्ह्ह

(एक नए दिन के साथ एक नयी शुरुआत हुई पर, मीरा के ज़हन में न जाने क्यों आरव का खयाल आता रहा।जैसे- जैसे दिन बीतते गए मीरा अपने काम में और अपनी जिंदगी में वापस बिजी हो गयी। कई दिन बीते और मीरा एक दिन काम से घर लौट रही थी तभी उसे एक जानी पहचानी आवाज ने रोका। वो आवाज किसी और की नहीं आरव की थी, जिसके बारे में वो सोचना अवॉइड करती रही।)

मीरा – ओह गॉड ये यहाँ क्यों?

आरव – हाय, कैसी हो तुम? अरे क्या हुआ? कुछ बोल नहीं रही हो?

मीरा – हाय, म.. मैं ठीक हूँ, सॉरी वो मैं कुछ सोच रही थी तो और अचानक तुम आ गए तो थोड़ी घबरा गयी और तुम यहाँ क्या कर रहे हो ?

आरव – वो असल में मीटिंग के लिए आया था इसी बिल्डिंग में, आई जस्ट गॉट डन विथ इट ,बस घर जा रहा था अभी।

मीरा -ओके..

आरव –तुम भी घर जा रहीं हो?

मीरा – मैं भी बस घर ही जा रहीं हूँ।

आरव – ओह ग्रेट, कैन आई ड्राप यू?

मीरा – हाँ पर कैसे जा रहे हो तुम?

आरव – बहुत बड़ी गाड़ी है ट्रेन, तुम्हे तुम्हारे स्टेशन तक ड्राप कर दूंगा।

मीरा –ठीक

आरव – मीरा,तुम जनरल कम्पार्टमेंट में चढ़ी हो कभी ?

मीरा – नहीं कभी भी नहीं।

आरव -पर आज तो तुम्हें जनरल से ही जाना होगा।

मीरा – मतलब?

आरव -अरे मैं जो तुम्हें ड्राप करने जा रहा हूँ।अब मैं तो लेडीज कम्पार्टमेंट में चढ़ने नहीं वाला।

मीरा – देखो आरव ,मैं इस आईडिया को लेकर बहुत कॉंफिडेंट नहीं हूँ, मतलब, क्या हम…

आरव – न हम यहीं कर रहे हैं। जो चीज कभी ट्राइ ही नहीं की उसके बारे में पहले से हीं  आभास करना, अच्छी बात नहीं है और मैं हूँ न तुम्हारे साथ। फिर कोई बात नहीं । आ.. ये देखो ट्रेन भी आ गयी।बांकी बातें हम ट्रेन में कर लेंगे ओके।

आरव – संभल के।

मीरा -अह्ह्ह्ह आरव… यहाँ तो बहुत भीड़ है।

आरव – घबराओ मत  मैं अपने दोनों हाथ तुम्हारे दोनों साइड रख लूँगा ताकि तुम्हे कोई टच न कर सके।

(मीरा को किसी लड़के ने पहली बार छुआ था, उसकी रगों में तो जैसे करंट ही दौड़ गया। वो समझ  रही थी कि ऐसा क्यों हो रहा था।जैसे-जैसे भीड़ थोड़ी और बढ़ गयी वैसे- वैसे आरव उसके और करीब आ गया, इस बार मीरा उसके सांसों को सुन पा रही थी ,जैसे आरव उसके गले लग गया हो।)

(जैसे-तैसे मीरा ने अपने आपको संभाला और, थोड़ी दूरी रखने की कोशिश की। पर वो बस आरव को देखती रह गयी और दूसरी ओर आरव सिर्फ ये देखने  में लगा हुआ था कि कोई मीरा को टच तो नहीं कर रहा है। आरव के चेहरे पर एक बड़ी प्यारी सी मासूमियत थी, ऑनेस्टी थी।मीरा को उसके इस रूप ने बहुत ज्यादा इम्प्रेस किया।आरव को अब वो थोड़ा और रेस्पेक्ट करने लगी थी)

(ट्रेन के हॉर्न की आवाज)

मीरा – क्या मेरा स्टेशन है ये  ?

आरव -हाँ हाँ तुम्हारा हीं स्टेशन है। आगे… एक मिनट एक्सक्यूज़ मी, इनको उतरना है थोड़ा साइड दीजिये न प्लीज. आओ…

अच्छा बाय। जैसे ही घर पहुँचो मुझे मैसेज कर देना

मीरा – पर तुम्हारा नंबर?……..

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