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हम सभी इस शब्द, “टाइम मैनेजमेंट ” के बारे में सुनते हुए ही बड़े हुए हैं। हजारों पुस्तकें एवं लेख हैं जो टाइम मैनेजमेंट से होने वाले लाभों के बारे में बताते हैं तथा कभी-कभी बड़े प्रभावी ढंग से इसके लिए लोगों को सुझाव भी देते हैं। ‘टाइम मैनेजमेंट ‘ एक ऐसी आम सलाह है जो आप अपने दोस्तों,शिक्षकों को, काम के दौरान अपने सहयोगियों को,अपने बॉस और यहां तक कि अपने ऑफिस के ‘एच आर’ तक से सुनते रहते हैं.

आपको खुद को टाइम के साथ तालमेल बैठाने की जरूरत है, या समय प्रबंधन में सुधार करने का एक प्रभावी क्षेत्र है जिसके बारे में हमें सोचने की जरूरत है। इसलिए आपको समय प्रबंधन में महारत हासिल करने के लिए इसको सीखने की ओर अग्रसर होना चाहिए।

टाइम मैनेजमेंट दरअसल सही,उपयुक्त नाम नहीं है। जिस दर्शन और तकनीक से यह अनुशासन उत्पन्न होता है वह उल्लेखनीय और पूर्णतया प्रभावशाली है, वहीं नाम से स्वयं को लाभ की अपेक्षा अधिक नुकसान होता  है । सेक्सपीरियन लहजे में आप शायद पूछना चाहेंगे कि,”नाम में क्या रखा है”? निस्संदेह मेरा जवाब होगा,”यह पूरी तरह अपने नाम की तरह ही है, नाम अच्छा हो तो फायदा करने की  बजाय ज्यादा नुकसान करता है” ” और आपका दिमाग इसे कैसे समझ सकता है? हमारे यहां हमारे सभी तार्किक और विश्लेषणात्मक विचार हमारे विवेकशील दिमाग द्वारा  किए जाते हैं। वही हमारे मस्तिष्क का एक बड़ा और अधिक शक्तिशाली भाग– “अवचेतन मन” है, जो हमारी जागरूकता के बिना चुपचाप चलता(काम करता) रहता है

हमारा अवचेतन मन हमारे मनोवेगों,विश्वासों,भावनाओं,डर और मन के अंदर स्वचालित रूप से बारंबार बनने वाली आकृतियों का जिम्मेवार होता है। यही हमारी यादों को पूरी क्षमता के साथ दिमाग में सहेजकर रखता है। साथ ही यह सबकुछ अक्षरशः ग्रहण करता है और किसी प्रकार के खंडन को स्वीकार नहीं करता है। मैं आपको सभी का एक उदाहरण देता हूं– मेरे कहने पर सोचें कि आप जो भी करते हैं करते रहें,लेकिन गुलाबी हाथी के बारे में न सोचे। किंतु कुछ  क्षण में ही आपके दिमाग में एक गुलाबी हाथी की तस्वीर आ जाएगी। ऐसा क्यों होता है, जब मैं आपको एक गुलाबी हाथी के बारे में सोचने के लिए नहीं कहता हूं तो आपका दिमाग इस बात की सच की जांच करने का प्रयास करता है कि वह गुलाबी हाथी के बारे में नहीं सोच रहा है।

दिमाग में एक हाथी की छवि को लाकर ही यह जांचा जा सकने वाला एकमात्र तरीका है और फिर अपने आसपास की किसी भी सोच को हटाने की कोशिश करना और खुद को साबित करने की प्रक्रिया में (एक गुलाबी हाथी के बारे में नहीं सोचना) यह विफल होता है। अब अक्षरशः सोच के उदाहरण पर आते हैं। मान लीजिए कि आपका लक्ष्य अधिक धन प्राप्त करना है। इसलिए यदि आप को अनायास ही 20 का नोट मिल जाता है तो आपको लक्ष्य हासिल हुआ |  क्या वास्तव में ऐसा है ? क्या आप इससे भी ज्यादा नहीं चाहेंगे ? क्या यह सही है? लेकिन आपका अवचेतन मन शाब्दिक रूप से सोचता है। 20 रूपये प्राप्त करना जो आपके पास पहले से अधिक है। यही बात समय प्रबंधन के साथ भी होती है जब आप बराबर समय प्रबंधन के बारे में सुनते या पढ़ते हैं तो यह वस्तुतः आपके अवचेतन मन को इस सोच से जोड़ देता है कि आप समय का प्रबंध कर रहे हैं जो कि कुछ बाहरी है तब आप उस लेख या पुस्तक की विषय वस्तु में आ जाते हैं,जिसे आप पढ़ रहे होते हैं और तब यह अचानक उन योजनाओं एवं तकनीकों के बारे में सोचने लगता है कि आपके पास जो समय बचा हुआ है उसका बेहतर देखरेख आप किस तरह से कर सकते हैं। इस वक्त आपका दिमाग (मन) चला जाता है,”एक क्षण रुकिये, क्या हम अभी भी समय प्रबंधन या खुद को प्रबंधित करने के बारे में बातें कर रहे हैं”? मैं सोचता हूं, कि हम लोग समय प्रबंधन के बारे में बातें कर रहे थे,लेकिन ऐसा लगता है कि यह एक जाल (छलावा) है, भ्रम है, यह अनिश्चितता और परस्पर विरोधी भाव महसूस कराता है और अपने स्वाभाविक व्यवहारपरक सांचे में वापस आना पसंद करता है।

अपनी पुस्तक “द मोंक हू सोल्ड हिज फेरारी” में लेखक रॉबिन शर्मा समय की महत्ता पर जोर देते हुए कहते हैं,” कि हम विशेषाधिकार प्राप्त किए हों या हम इससे वंचित रहें हों,चाहे हम टेक्सास में हों या टोक्यो में हों,’ हम सभी के पास दिन के सिर्फ 24 घंटे ही हैं। जो लोग एक असाधारण जीवन जीते हैं उन्हें सामान्य लोगों से सिर्फ एक चीज अलग करती है वह है समय का सही सदुपयोग |  जिस तरह से वे इस समय का उपयोग करते हैं। इतने सुंदर तरीके से लिखी गई चतुराई भरी कल्पित शिक्षाप्रद कहानी के माध्यम से बताया गया है कि कोई भी आदमी समय का प्रबंधन कभी नहीं कर सकता है।

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