By

यादगार गुज़रे हुए लम्हों की कसक प्रतियोगिता के विजेता, अविनाश चंचल खांटी बिहारी हैं, हज़ारों नवयुवकों की तरह अविनाश भी रोज़ी -रोटी के लिए गांव को छोड़कर शहर आ गए थे. पर कभी अपने को  गांव से अलग नहीं कर पाएं. इसलिए ही जब भी वक्त मिलता है वो शहर और गांव दोनों को घूमने,जानने, करीब से देखने और उसको जीने के लिए  निकल पड़ते हैं.लेखक होने के साथ साथ अविनाश पेशे से कम्यूनिकेटर और एक्टिविस्ट भी हैं.

आपकी कहानी ‘यादगार गुज़रे हुए लम्हों की कसक’ प्रतियोगिता की विजेता कहानी रही है.थोड़ा सा कहानी के बारे में विस्तार से बताएं.

वह गर्मी का एक दिन था, जब अचानक से मुझे लीची दिख गयी थी। उस एक लीची के सहारे मैं अपने बचपन में चला गया। फिर जो लिखा और अपने दोस्तों को पढ़ाया तो लगा कि ये तो हम सबके बचपन की कहानी है। तो उस कहानी में जो लीची है वो खिड़की है दरअसल, हम सबके बचपन और गर्मी में बीते बचपन की स्मृति उस खिड़की से होकर गुजरती है।

हम अपने बचपन की स्मृतियों में अनगिनत यादें जोड़ते हैं, लेकिन समय बीतता जाता है और हम उन्हें कहीं भूलते जाते हैं। लेकिन शायद वो सब हमारे दिमाग के किसी हिस्से में, किसी अँधेरे कमरे में गुम हो जाता है। कभी जब उस अंधेरे कमरे तक कोई एक लौ, कोई एक डिबिया लेकर पहुंचता है तो अचानक वो सारी यादें रौशनी से भर जाती हैं।

फिर उस रौशनी से छन-छन कर कहानियां एक-एक कर बाहर आने लगती हैं। गर्मी में अपने देस की याद आने की कहानी भी कुछ वैसी ही है। थोड़ी ज्यादा बचपन,स्मृतियों और जीवन के भूले-पन्ने बिसरे को याद करने की एक कोशिश।

लेखक बनने का ख्याल कैसा आया? आपको लेखन की प्रेरणा कहाँ से मिलती है?

कुछ लोग लेखक बनना चुनते हैं, कुछ लोगों को लिखना खुद चुनने चले आते हैं। मुझे पता नहीं कि मैंने कैसे लिखना शुरू किया, खुद से किया या फिर किसी ने भीतर से जबरदस्ती धक्का दे-दे कर करवाया। अब तो ठीक-ठीक से याद नहीं।

लेकिन अचानक भावनाओं की नदी में बहना हमेशा से अच्छा लगता रहा। ख्यालों में डूबकी लगाना भी उतना ही प्यारा रहा। चीजों को तीव्रता से महसूस कर सकना एक वजह हो सकती है सो लिखने लगा।

लिखने की प्रेरणा की बात करें तो वो खुद ही चली आती है, आसपास की चीजों को सूक्ष्म तरीके से देख सकने की कोशिश करने की जद्दोजहद में लिखना भी हो जाता है। शायद एक बेचैनी भी है,  उस बेचैनी से बचने की एक कोशिश है लिखना।

आपके द्वारा लिखी गई पसंदीदा रचना जो आपके दिल के सबसे क़रीब है और क्यों?

मेरे जैसा आदमी जो हमेशा सेल्फ डाउट से घिरा रहता हो उसके लिये अपने लिखे को पसंद कर पाना सबसे कठिन काम है। फिर भी कभी-कभी मैं अपनी माँ को चिट्ठी लिखता हूं। मुझे लगता है कि वो लिखा मेरे दिल के सबसे करीब है।

आपके बेस्टसेलिंग लेखकों और किताबों की सूची में हिंदी के कौन कौन से लेखक/लेखिकाएं आती हैं?

 मुझे हिन्दी में निर्मल वर्मा का लिखा सबकुछ पसंद है। उनके विचारों से मैं असहमत भी हो तो भी कहूंगा कि उनका लिखा एकांत में जाने का एक पुल है, जिससे होकर गुजरना न चाहकर भी सुख देने वाला है।

इसके अलावा मन्नू भंडारी, ममता कालिया, राजेन्द्र यादव, फणीश्वरनाथ रेणु, मलयज, स्वदेश दीपक जैसे लेखकर बहुत पसंद हैं।

नये लेखकों में मानव कौल के लिखे से प्रेम है, वहीं किशोर चौधरी का लिखा भी पढ़ने का मन होता है।

हिंदी में लिखने वालों के लिए क्या आप कोई सुझाव देना चाहेंगे?

हिन्दी में लिखने वाले एक खास तरह के बैकग्राउंड से आते हैं, जहां पितृसत्ता, जातिवाद और मध्यम वर्ग की तमाम बुराईयाँ मौजूद हैं। मुझे लगता है हम सबको अपने उस समाज को अपने लिखे में शामिल करना जरुरी है।

आजकल जिस तरह से नफरत का माहौल है, झूठ को नया सच बनाया जा रहा है, हमें जरुरत है कि हम उस झूठ के खिलाफ लिखें, प्रेम के लिये लिखें और अपने लिखे शब्दों से दुनिया को थोड़ा और सहने लायक बनायें।

अविनाश चंचल की कहानी पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

 

 

Leave a Reply